भिलाई/सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार राम नगर स्थित स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में आयुष्मान योजना की उड़ रही हैं धज्जियां। प्राप्त जानकारी अनुसार विगत दिनों कैंप निवासी एक युवक को सीने में दर्द होने पर उक्त अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां मौजूद स्टॉफ ने जांच उपरांत नस ब्लॉक होना बताया और उपचार प्रारंभ किया। दूसरे दिन मरीज़ के बड़े भाई ने मैनेजमेंट के कर्मचारी से चर्चा की तो उसने आयुष्मान योजना के तहत ईलाज होने की बात कही जिस पर परिवारजनों ने हामी भरी। तत्पश्चात मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्टेंट डाला गया और कुछ पैसे जमा करवाए गए,दवा खुद घर वाले लाकर देते थे। 3 – 4 दिनों बाद जब घर वाले मरीज को डिस्चार्ज करवाने गए तो हॉस्पिटल के स्टाफ ने पूरा पैसा जमा करने को कहा जिसको सुन कर पेशेंट की पत्नी के पैरों तले जमीन खिसक गई। जब आयुष्मान विभाग में बात करने गई तो वहां ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी के द्वारा महिला के साथ दुर्व्यवहार और बदतमीजी की गई और धमकाते हुए कहा कि जो करना हैं कर लो, आयुष्मान योजना लागू नहीं करूंगा जबकि पूर्व में बोला गया था कि आयुष्मान से इलाज होगा। जब इस घटना की खबर मीडिया को लगी तो वहां जाने पर कोई जिम्मेदार जवाब देने सामने नहीं आया ऊपर से घर वालों और प्रेस वालों के साथ बात करने से कतराते रहे। जहां डॉक्टरों को भगवान और अस्पताल को अभयदान देने वाला कहा जाता हैं वहां इस प्रकार की घटना घट रही हो तो निश्चित रूप से लोगों का विश्वास डोलना स्वाभाविक हैं। क्या इस मामले पर अस्पताल प्रबंधन के ऊपर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ? सबसे बड़ी बात यह है कि उक्त हॉस्पिटल में आयुष्मान योजना को लेकर किसी प्रकार का कोई बोर्ड नहीं टांगा गया हैं आखिर क्यों ? जानकारों का कहना हैं कि हर हॉस्पिटल्स को स्पष्ट शब्दों में बोर्ड टांग कर इसकी जानकारी हर मरीज व उसके परिजनों को देना हैं ताकि बाद में विवाद की स्थिति निर्मित न हो लेकिन प्रबंधन ने आयुष्मान योजना से संबंधित कोई बोर्ड नहीं लगाया है जो कि अनेक संदेहों को जन्म दे रहा हैं। यहां पर एक प्रश्न यक्ष की तरह खड़ा होता हैं कि जब सरकार, आम जनता को आयुष्मान योजना का लाभ देना चाहती हैं तो अस्पताल क्यों नहीं? क्या इस बात की भी जांच नहीं होना चाहिए ? ऐसे बहुत से सवाल हैं जिनका जवाब अस्पताल प्रबंधन को आम जनता को देने चाहिए ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।
