भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, 3 अगस्त को राष्ट्रीय कवि मैथिली शरण गुप्त की जयंती श्रद्धा सम्मान के साथ मनाई जाती है । उनका जन्म 3 अगस्त 1886 को उत्तर प्रदेश के चिरगांव झांसी में हुआ था । वह हिंदी साहित्य के खड़ी बोली, काव्य के प्रमुख स्तंभों में से एक थे उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय प्रेम, भारतीय संस्कृति, सामाजिक चेतना तथा मानवीय मूल्यों का सुंदर चित्रण मिलता है । उनकी प्रसिद्ध कृतियों में भारत भारती संघ के साकेत यशोधरा और पंचवटी विशेष रूप से उल्लेखनीय है । हिंदी साहित्य में उनके अमूल्य योगदान के कारण उन्हें राष्ट्रीय कवि की उपाधि से सम्मानित किया गया। मैथिलीशरण गुप्त की जयंती हमें उनके आदर्शों, देशभक्ति और साहित्यिक विरासत को स्मरण करने का अवसर प्रदान करती है । इस अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विभिन्न संस्थाओं में काव्य पाठ, विचार गोष्ठी, भाषण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । उनका जीवन और साहित्य आज भी नई पीढ़ी को राष्ट्रीय प्रेम, नैतिकता, सामाजिक समरसता तथा भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है। उनकी जयंती पर उनके विचारों को आत्मसात करने और हिंदी भाषा एवं साहित्य के संवर्धन का संकल्प ले।
