भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं । श्री रेड्डी का जन्म 19 मई 1913 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में हुआ था । उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया तथा भारतीय लोकतंत्र को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । वे आंध्र प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने और बाद में लोकसभा अध्यक्ष के रूप में भी अपनी निष्पक्षता एवं गरिमा में कार्य शैली के लिए प्रसिद्ध रहे वर्ष 1977 में हुए भारत के छठे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए तथा 1982 तक इस सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को सफलतापूर्वक निभाया । 25 जुलाई 1977 को भारत के छठे राष्ट्रपति बने उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि भारत के इतिहास में निर्विरोध चुने जाने वाले एकमात्र राष्ट्रपति बने उनका संपूर्ण सार्वजनिक जीवन सादगी, ईमानदारी, कर्तव्य निष्ठा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण रहा । नीलम संजीव रेड्डी का 1 जून 1996 को 83 वर्ष की आयु में बेंगलुरु में निधन हो गया । नीलम संजीव रेड्डी के शानदार राजनीतिक सफर और संघर्ष को को करीब से जानने के लिए उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर हम उनके राष्ट्रीय निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें सादर नमन करते हैं उनके आदर्श, सेवा भावना एवं लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रति सम्मान और आने वाली पढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे । राष्ट्र उनके योगदान को कृतज्ञतापूर्वक याद करता रहेगा । विन्रम श्रद्धांजलि ।
