भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, गोपीनाथ बोरदोलोई का जन्म 6 जून 1890 को असम के नवागांव जिले में हुआ था । उन्होंने कानून के पढ़ाई और युवावस्था में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए । महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित बोरदोलोई ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं बल्कि सेवा का रास्ता माना । असम की जनता के बीच उनकी लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि उन्हें लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई कहां जाने लगा । असम के पहले मुख्यमंत्री और गांधीवादी नेता और आजादी के बाद गोपीनाथ बोरदोलोई असम के पहले मुख्यमंत्री बने । वे जीवन के आखिरी दिन तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहे । बोरदोलोई पंडित जवाहरलाल नेहरू के करीबी थे, लेकिन जब बात असम की आई तो उन्होंने अपने विचारों पर कोई समझौता नहीं किया उन्होंने नेहरू को समझाया कि असम की भौगोलिक स्थिति पूरे उत्तर पूर्व की रक्षा से जुड़ी है । आखिरकार नेहरू भी इस निष्कर्ष पर पहुंचे की बोरदोलाई की सोच दूरदर्शी है और असम को भारत में बनाए रखना अनिवार्य है । वर्ष 1999 को गोपीनाथ बोरदोलोई को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया । 5 अगस्त 1950 को गोपीनाथ बोरदोलोई का निधन हुआ, लेकिन उनकी सोच और संघर्ष असम की राजनीति में आज भी जीवित है । इस महान नेता को उनकी पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
