भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, गोस्वामी तुलसीदास भारतीय, भक्ति आंदोलन के महान संत कवि और समाज सुधारक थे।उनका जन्म 16वीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश में हुआ । माना जाता है कि उन्होंने अवधी भाषा में रचित श्री रामचरितमानस के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श, चरित्र और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जन_जन तक पहुंचाया । अन्य प्रमुख रचनाओं में हनुमान चालीसा, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली तथा दोहावली शामिल है । तुलसीदास जी ने सरल भाषा में धर्म, नैतिकता, समरसता और लोककल्याण का संदेश देकर भारतीय साहित्य और संस्कृति को अमूल्य योगदान दिया। 30 जुलाई को उनके पुण्यतिथि पर समूचा देश उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण करता है । परंपरागत मान्यता के अनुसार उनका देहाशान वर्ष 1623 में काशी (वाराणसी) के अस्सी घाट के निकट में हुआ था। उनका साहित्य आज भी समाज को सत्य, मर्यादा, करुणा,सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है । इस अवसर पर हम सभी गोस्वामी तुलसीदास जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ।
