दुर्ग/भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा जिला दुर्ग द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “12 साल बेमिसाल” किसान सम्मेलन एवं जैविक खेती पर कार्यशाला का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) अनुसंधान केंद्र, अंजोरा (दुर्ग) में किया गया। कार्यक्रम भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष रोहित सिंह राजपूत के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों, मिट्टी की उर्वरता एवं संरक्षण, जैविक उत्पादों के महत्व तथा प्राकृतिक खेती के लाभों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया। उपस्थित किसानों ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने तथा स्वस्थ मिट्टी, समृद्ध किसान एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल, भाजपा प्रदेश मंत्री जितेंद्र वर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेश कौशिक, भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष आलोक ठाकुर, पदमा देवांगन, कीर्ति नायक, डॉ. चौलेश्वर चंद्राकर, माया बेलचंदन, अजीत चंद्राकर, भाजपा भिलाई जिला अध्यक्ष दीपक यादव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं किसान उपस्थित रहे। अपने संबोधन में भाजपा प्रदेश मंत्री जितेंद्र वर्मा ने धरती पुत्र किसानों को नमन करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प तभी साकार होगा जब कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनेगा। उन्होंने कहा कि अत्यधिक रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है। किसानों को कम लागत वाली प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाकर गोबर खाद एवं अन्य पारंपरिक संसाधनों का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए। भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष आलोक ठाकुर ने कहा कि अधिक उत्पादन की होड़ में हम आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की लागत कम करती है, बल्कि मिट्टी, जल और पर्यावरण का संरक्षण भी करती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया। दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक दौर में किसानों के मन में उत्पादन कम होने की आशंका रहती है, लेकिन दीर्घकाल में प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने, भूमि की गुणवत्ता सुधारने तथा स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने किसानों से जैविक खेती की दिशा में आगे बढ़ने और कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए प्राकृतिक खेती के विभिन्न मॉडल, जैविक खाद निर्माण, मिट्टी परीक्षण तथा फसल प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। इस अवसर पर सैकड़ों किसान, किसान मोर्चा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
