भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, 17 अक्टूबर को महात्मा गांधी द्वारा प्रारंभ किए गए व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृति को नमन l यह आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। 17 अक्टूबर 1940 को महात्मा गांधी के नेतृत्व में व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत हुई थी। इस आंदोलन के प्रथम सत्याग्रही आचार्य विनोबा भावे थे, जिन्होंने महाराष्ट्र के वर्धा के निकट पवनार में युद्ध-विरोधी भाषण देकर आंदोलन का शुभारंभ किया। इसके बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू दूसरे सत्याग्रही बने।
व्यक्तिगत सत्याग्रह का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शासन द्वारा भारतीयों को द्वितीय विश्वयुद्ध में शामिल करने के विरोध में अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना था। महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण विरोध को इस आंदोलन का आधार बनाया। यह आंदोलन हमें सिखाता है कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भी अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई जा सकती है। यह ऐतिहासिक दिवस हमें स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, साहस और देशभक्ति से प्रेरणा लेने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का संदेश देता है।
