जगदलपुर/बस्तर में पिछले 48 घंटे की भारी बारिश से जगदलपुर सहित अनेक शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। कई वार्डों और गांवों में जलभराव, घरों में पानी घुसने, आवागमन बाधित होने तथा कृषि फसलों को नुकसान की स्थिति सामने आई है। बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी निरीक्षण कर नागरिकों की समस्याओं और राहत व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया।”””सवाल बारिश पर नहीं-सरकारी तैयारी और नियोजन पर है””: नवनीत चाँद ने कहा कि अत्यधिक वर्षा को रोका नहीं जा सकता, लेकिन आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पूर्व-तैयारी, जोखिम-मानचित्रण, जलनिकासी, राहत व्यवस्था और वैज्ञानिक शमन योजना सरकार की जिम्मेदारी का हिस्सा हैं। बार-बार जलभराव वाले क्षेत्रों में अब केवल अस्थायी राहत पर्याप्त नहीं है। ड्रेनेज की क्षमता, प्राकृतिक जलप्रवाह, नालों एवं आउटफॉल, सड़क -पुलिया डिजाइन, निर्माण स्तर, जलनिकासी नेटवर्क और शहरी विस्तार की वैज्ञानिक योजना की समीक्षा जरूरी है। आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जिला आपदा प्रबंधन योजना में संवेदनशील क्षेत्रों, रोकथाम एवं शमन उपायों, विभागीय जिम्मेदारियों, तैयारी और त्वरित राहत की व्यवस्था शामिल होनी चाहिए। सरकार और प्रशासन से 7 स्पष्ट सवाल- 1. जगदलपुर एवं बस्तर के वर्तमान जलभराव-प्रवण क्षेत्रों की आधिकारिक सूची क्या है? 2.इन क्षेत्रों में पिछले वर्षों में जलनिकासी सुधार के लिए कितना बजट स्वीकृत, खर्च और उपयोग हुआ?3.जगदलपुर के प्रमुख स्टॉर्म-वॉटर ड्रेनेज, नालों, पुलियों और आउटफॉल की डिजाइन एवं वास्तविक क्षमता कितनी है? 4.क्या प्रमुख जलनिकासी संरचनाओं का स्वतंत्र हाइड्रोलॉजिकल/हाइड्रोलिक एवं तकनीकी ऑडिट कराया गया है? 5.क्या सड़क, भवन एवं अन्य निर्माण परियोजनाओं में प्राकृतिक जलप्रवाह और वर्षा-जोखिम का वैज्ञानिक आकलन किया गया? 6.जिला आपदा प्रबंधन योजना के अनुसार इस वर्ष भारी बारिश से पहले कौन-कौन से पूर्व-राहत एवं बचाव उपाय किए गए?
7.जिन क्षेत्रों में बार-बार जलभराव हो रहा है, वहां स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना और बजट कहां है?””अब हर नुकसान का वैज्ञानिक पंचनामा हो”””: प्रशासन तत्काल संयुक्त सर्वे दल गठित कर प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर एवं खेत-खेत नुकसान का सर्वे कराए। सर्वे में जलमग्न/क्षतिग्रस्त मकान एवं परिवार,विस्थापित एवं प्रभावित नागरिक, फसलवार एवं क्षेत्रफलवार कृषि क्षति,पशुधन एवं अन्य संपत्ति की क्षति,सड़क, पुलिया,नाली एवं सार्वजनिक अधोसंरचना की क्षति, आजीविका एवं आवश्यक सेवाओं पर प्रभाव। का पारदर्शी, सत्यापन योग्य और यथासंभव जियो-टैग्ड रिकॉर्ड तैयार किया जाए। पात्र प्रभावित परिवारों और किसानों को लागू SDRF/राज्य राहत मानकों एवं शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार समयबद्ध राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए। छत्तीसगढ़ SDMA के अनुसार SDRF अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं में निर्धारित मानदंडों के अनुसार तत्काल सहायता के लिए उपयोग किया जाता है।
“””जगदलपुर के लिए स्थायी Urban Flood Management Plan बने””: नवनीत चाँद ने मांग की कि जगदलपुर के लिए Urban Flood & Drainage Resilience Plan तैयार किया जाए, जिसमें GIS आधारित जलभराव मैपिंग + प्राकृतिक जलप्रवाहों की पहचान + ड्रेनेज क्षमता परीक्षण + नाला/आउटफॉल सुधार + नियमित डी-सिल्टिंग + सड़क-पुलिया डिजाइन समीक्षा + भविष्य की वर्षा-जोखिम आधारित निर्माण मानक को शामिल किया जाए। इस योजना की लागत, बजट, कार्य एजेंसी, तकनीकी DPR, समयसीमा और प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। नवनीत चाँद ने कहा- “बस्तर में बारिश प्राकृतिक है, लेकिन हर बार वही इलाके डूबें और हर बार जनता नुकसान उठाए—यह केवल मौसम का सवाल नहीं रह जाता। अब सरकार को राहत से आगे बढ़कर यह बताना होगा कि जोखिम कम करने के लिए क्या तैयारी की गई, कितना पैसा खर्च हुआ और स्थायी समाधान कब तक होगा।” उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राजनीति से पहले नागरिक सुरक्षा, राहत, बचाव और नुकसान का निष्पक्ष आकलन प्राथमिकता है। लेकिन राहत के बाद जवाबदेही और स्थायी समाधान से सरकार बच नहीं सकती। “बस्तर की जनता को हर बारिश के बाद राहत नहीं, ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें अगली बारिश में नुकसान कम हो।”
