दुर्ग/साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, संस्कृति, विचारों और जीवन मूल्यों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को दिशा देने के साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी समृद्ध करते हैं। इसी साहित्यिक साधना और सृजनशीलता को आत्मीय सम्मान देते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर साहित्यकार त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ को ‘विष्णु के पाती’ के माध्यम से बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र के माध्यम से श्री त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ के लेखन एवं साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए उनके सृजनात्मक प्रयासों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री की ओर से प्राप्त यह आत्मीय संदेश श्री अम्बर के लिए केवल शुभकामना पत्र नहीं, बल्कि उनकी साहित्यिक साधना और वर्षों के सृजन के प्रति मिला एक महत्वपूर्ण सम्मान है।मुख्यमंत्री के इस स्नेहपूर्ण पत्र से अभिभूत त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ ने भी पत्र लिखकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस सम्मान को अपने लिए गौरव और प्रेरणा का विषय बताते हुए साहित्य एवं लेखन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और अधिक ऊर्जा मिलने की भावना व्यक्त की। यह प्रसंग इस बात का सुंदर उदाहरण है कि जब शासन और नेतृत्व समाज के रचनाकारों, साहित्यकारों एवं सृजनधर्मियों के योगदान को पहचानकर उनका सम्मान करते हैं, तो इससे न केवल संबंधित व्यक्ति का उत्साह बढ़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा मिलती है। साहित्यकारों का सम्मान वास्तव में प्रदेश की भाषा, संस्कृति और वैचारिक विरासत का सम्मान है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की यह आत्मीय पहल छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना और सृजनशील परंपरा के प्रति सम्मान की एक संवेदनशील अभिव्यक्ति है
