भिलाई/प्राप्त जानकारीनुसार पॉवर हाउस स्थित राजराजेश्वरी मंदिर के पीछे रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर कचरे का अंबार लगा हुआ हैं जिसकी वजह से स्थानीय दुकानदार एवं आमजनता अत्यधिक परेशान हैं और निगम प्रशासन मौनी बाबा बना बैठा है जो कि लोगों को रास नहीं आ रहा हैं जिसकी वजह से आक्रोश व्याप्त हैं। यहां पर आप देखेंगे तो पाएंगे कि मंदिर से ठीक सट कर कचरे का ढेर लगा हुआ हैं और वहां पर लोग पेशाब भी कर रहे हैं इसके अलावा पानी पाऊच एवं डिस्पोजल आदि पड़ा है इसके साथ ही झाड़ झड़ूले उग आए हैं जिसके कारण भयंकर बदबू आ रही हैं। ऊपर से लोग भी कचरा फेंक देते हैं,कथित रूप से कहा जा रहा हैं कि मंदिर का कूड़ा भी यहीं पर फेंका जाता हैं जो कि गंदगी का एक बड़ा कारण बताया जा रहा हैं। बरसात में पानी गिरने की वजह से सड जाने के कारण प्रदूषण हो रहा हैं। कथित तौर से आप सभी जानते हैं कि पानी पाऊच एवं डिस्पोजल( ग्लास, कप,प्लेट) मुख्य रूप से सिंथेटिक प्लास्टिक पॉलिमर्स से बनते हैं जो कच्चे तेल(पेट्रोलियम) के प्रसंस्करण से प्राप्त होते हैं। इससे प्रमुख रूप से पानी के पाऊच LDPE(लो-डेंसिटी पॉलीइथाईलीन) नाम के पतले और लचीले प्लास्टिक से बनाएं जाते हैं और डिस्पोजल ग्लास और प्लेट्स ये आमतौर पर पॉलीप्रोपाइलीन(P P) और पॉलीस्टायरिन (PS/थर्मोकोल) या (PET) पॉलीइथाईलीन टेरेफथेलेट से बनते हैं। जमीन पर लंबे समय तक पड़े रहने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता का नाश होता हैं जमीन पर प्लास्टिक की परत बिछ जाने से धूप और हवा मिट्टी के अंदर नहीं पहुंच पाती। इससे मिट्टी के जरूरी केंचुए और सूक्ष्मजीव मर जाते हैं,जिससे जमीन बंजर होने लगती हैं। समय के साथ धूप और गर्मी के कारण ये प्लास्टिक माइक्रोप्लास्टिक और जहरीले रसायनों में टूटने लगते हैं। ये रसायन बारिश के पानी के साथ रिसकर जमीन के नीचे चले जाते हैं और पीने के पानी (भूजल) को जहरीला बना देते हैं। कचरे के ढेर में पड़े इन पाऊच और डिस्पोजल को आवारा पशु भोजन के लालच में खा लेते हैं,उनके पेट में आंतों को ब्लॉक कर देता है,जिससे तड़प-तड़प कर उनकी मौत भी हो जाती हैं। जलभराव और बीमारियां भी होती हैं जिससे नागरिकों को परेशान होना पड़ता हैं। निगम प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
