भिलाई/दुर्ग/शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी और सर्व समाज कल्याण समिति अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू को जान से मारने की धमकी देने के मामले में दुर्ग कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने 2 आरोपियों को दोषी करार देते हुए 1-1 साल साधारण कारावास और ₹500-₹500 जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर 10 दिन की अतिरिक्त जेल भी भुगतनी होगी। दोषी करार दिए गए आरोपी हैं “राजेश कुमार गुप्ता” और समाजसेवी स्व. मंगा सिंह के बेटे “सतबीर सिंह उर्फ सोनू”। “”क्या था पूरा मामला?””- कुछ साल पहले 3 जनवरी को इंद्रजीत सिंह छोटू की हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी, हथखोज भिलाई के ऑफिस में रजिस्टर्ड डाक से एक सफेद लिफाफा आया था।””लिफाफे के अंदर धमकी भरा पत्र था जिसमें लिखा था””: -“छोटू क्यों इतना दुशमनी पाल रहा है। पूरे शहर से दुर्ग से रायपुर तक तेरे पीछे आदमी लग गए हैं। तुझे मारने के लिए आदमी बाहर से आ गए हैं। इतना पैसा क्या करेगा।” पत्र मिलने के बाद इंद्रजीत सिंह छोटू ने तत्काल भिलाई 3 थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धारा 506, 507 IPC के तहत अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में पता चला कि धमकी भरी चिट्ठी सेक्टर-2 पोस्ट ऑफिस से भेजी गई थी।””कोर्ट ने क्या कहा?””-
सजा के बिंदु पर सुनवाई में आरोपियों के वकील ने “पहला अपराध” बताकर परिवीक्षा या सिर्फ जुर्माने की मांग की। लेकिन अभियोजन ने कड़ी सजा की मांग की। न्यायालय ने कहा कि धारा 507 IPC में धमकी के साथ 2 साल तक की सजा का प्रावधान है। अपराध की गंभीरता और लंबे समय से लंबित प्रकरण को देखते हुए कोर्ट ने दोनों को: धारा 506 में 6 माह + ₹500 जुर्माना
“”धारा 507 में 6 माह साधारण कारावास “”- कुल 1 साल जेल और ₹500 अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माना जमा न करने पर 10 दिन अतिरिक्त जेल होगी। सजा वारंट तैयार कर दोनों को केन्द्रीय जेल दुर्ग भेजा जाएगा।””सबूत में क्या था””?-
मामले में कोर्ट ने एक सफेद लिफाफा, धमकी भरा पत्र, रजिस्टर, हस्तलिपि के नमूने और 1 सीडी कैसेट को साक्ष्य के रूप में अभिलेख के साथ सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने धारा 437(ए) के तहत जमानत और मुचलका को निर्णय से 6 माह तक प्रभावशील रखा है। इस फैसले से शहर के व्यापारियों में राहत है। इंद्रजीत सिंह छोटू ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है। धमकी देकर किसी को डराया नहीं जा सकता।
