भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, देश के प्रसिद्ध नाटककार, रंगकर्मी, पटकथा लेखक, कवि एवं अभिनेता हबीब तनवीर की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। हबीब तनवीर का जन्म 1 सितंबर 1923 को रायपुर, छत्तीसगढ़ में हुआ था। उन्होंने भारतीय रंगमंच को नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे लोककला, लोकभाषा और ग्रामीण कलाकारों को आधुनिक रंगमंच से जोड़ने के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘आगरा बाजार’ (1954) और ‘चरनदास चोर’ (1975) शामिल हैं। उन्होंने 1959 में ‘नया थिएटर’ की स्थापना की, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकनाट्य परंपरा और कलाकारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच मिला। हबीब तनवीर ने अपने सृजनात्मक कार्यों से भारतीय रंगमंच को एक नई दिशा दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोकभाषा, नाचा सहित लोक रंग परंपराओं और ग्रामीण कलाकारों को अपने नाटकों में प्रमुख स्थान दिया। ‘चरनदास चोर’ उनकी सर्वाधिक चर्चित कृतियों में से एक रही, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का गौरव बढ़ाया और 1982 में एडिनबर्ग फेस्टिवल फ्रिंज में फ्रिंज फर्स्ट पुरस्कार प्राप्त किया। हबीब तनवीर को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1969, पद्मश्री 1983, संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप 1996 तथा पद्मभूषण 2002 से सम्मानित किया गया। वे 1972 से 1978 तक राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे। 8 जून 2009 को उनके निधन से भारतीय रंगमंच ने एक महान कलाकार और चिंतक को खो दिया। हबीब तनवीर की कला, विचार और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
