भिलाई/ प्राप्त जानकारीनुसार नंदिनी रोड से लेकर एसीसी चौक तक फ्लाई ओवर( बोलचाल की भाषा में पुल या ओवरब्रिज भी कहा जाता हैं) बनना है जिसकी घोषणा हो चुकी हैं जिसके लिए मिट्टी की टेस्टिंग की जा रही हैं। इस टेस्ट के दौरान कुसुम पेट्रोल पंप के सामने की पाईप लाईन फूट चुकी हैं जिसे फूटे 4 दिन बीत जाने की बात कथित रूप से कही जा रही हैं। इस दौरान हजारों लीटर पानी सड़क पर और किनारे बह चुका हैं लेकिन निगम या जिला प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा हैं जिसको लेकर स्थानीय नागरिकों एवं राहगीरों में आक्रोश व्याप्त नजर आ रहा हैं। आप देखेंगे तो पाएंगे कि यहां पर जो मुख्य पाईप लाईन गई हैं उसमें छेद हो चुका हैं पानी का फुव्वारा फूट गया है जिससे अभी तक कितना पानी बह चुका हैं इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। लेकिन यहां पर सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का पालन सही रूप से कर रहे हैं? आइए हम आपको बताते हैं कि फ्लाई ओवर और अन्य मिलते जुलते शब्दों में क्या अंतर है।””फ्लाई ओवर “”: यह एक ऐसा ऊंचा मार्ग होता हैं जो किसी दूसरी सड़क या चौराहे के ऊपर यातायात को सुगम बनाने के लिए बनाया जाता हैं।””ओवरब्रिज “”:जब कोई पुल किसी रेलवे लाईन या अन्य बड़ी बाधा के ऊपर से गुजरता हैं तो उसे अक्सर ओवरब्रिज कहा जाता हैं।””ओवरपास””:यह फ्लाई ओवर का ही एक अंग्रेजी समानार्थी शब्द है, जिसका उपयोग सड़क या घाटी के ऊपर से दूसरे मार्ग को ले जाने के लिए होता हैं।””ब्रिज””: सामान्य तौर पर यह किसी नदी,नाले या पानी के स्रोत के ऊपर बना पुल होता हैं। कथित तौर से जानकारों का कहना हैं कि फ्लाई ओवर या ब्रिज बनाने से पहले मिट्टी की जांच जियो टेक्निकल इंजीनियर या भू-तकनीकी विशेषज्ञ करते हैं। इसके लिए निर्माण विभाग ( जैसे PWD,NHAI या स्थानीय नगर निगम) अधिकृत जियोटेक्निकल कंसल्टेंसी फर्म या NABL मान्यता प्राप्त मेटेरियल टेस्टिंग लैब को नियुक्त करता है। यहां पर जानकारी नहीं मिल पाई है कि किस विभाग के द्वारा मृदा की जांच,कौन कर रहा हैं? क्योंकि काम कर रहे कर्मचारियों से जब हमने पूछा तो उन्होंने कथित रूप से कहा कि हमको नहीं मालूम कौन करवा रहा हैं? सवाल यह उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन?
