भिलाई /छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, भारत के चौथे राष्ट्रपति, महान स्वतंत्रता सेनानी एवं प्रखर श्रमिक नेता भारत रत्न वराहगिरी वेंकट गिरि (वीवी गिरि) की जयंती पर उन्हें सादर नमन एवं श्रद्धांजलि अर्पित की। वीवी गिरि का संपूर्ण जीवन देश की स्वतंत्रता, श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा। 10 अगस्त 1894 को ओडिशा के बेरहामपुर में जन्मे वीवी गिरि ने आयरलैंड में शिक्षा प्राप्त की और वहां के स्वतंत्रता आंदोलन से भी प्रभावित हुए। भारत लौटकर वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हुए तथा देश के श्रमिक आंदोलन और ट्रेड यूनियन के प्रमुख नेताओं में अपनी पहचान बनाई। वीवी गिरि ने स्वतंत्र भारत में श्रम मंत्री सहित अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया तथा उत्तर प्रदेश, केरल और मैसूर के राज्यपाल भी रहे। वे वर्ष 1967 में भारत के उपराष्ट्रपति बने और 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक देश के चौथे राष्ट्रपति के रूप में राष्ट्र की सेवा की। वे स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में भारत के राष्ट्रपति निर्वाचित होने वाले पहले व्यक्ति थे। राष्ट्र के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान और श्रमिक हितों के लिए किए गए कार्यों को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1975 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। वीवी गिरि के विचार, संघर्ष और राष्ट्रसेवा की भावना आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
