भिलाई/नगर निगम भिलाई के क्षेत्रों में पिछले कई वर्षों से दवाई छिड़काव न किए जाने से मच्छरों का आतंक एकाएक बढ़ गया है और प्रशासनिक अधिकारी मौनी बाबा बने बैठे हैं। खासकर पूर्व में निगम प्रशासन के द्वारा बरसात के मौसम में दवाई का छिड़काई किया जाता था तथा शेष ऋतुओं में समय-समय पर कीटनाशक इत्यादि डाला जाता था ताकि जनता को मच्छर आदि हानिकारक कीड़ों से राहत मिल सके लेकिन पिछले कुछ वर्षों से ऐसा होता दिखलाई नहीं पड़ रहा हैं आखिर क्यों ? क्या निगम के अधिकारी किसी बड़ी बीमारी के फैलाने का इंतजार कर रहे हैं नालियों में नियमित रूप से कीटनाशी या एंटी लार्वा दवाओं को डालने से मच्छर एवं अन्य कीड़े की उत्पत्ति रुक जाती है जिससे गंभीर संक्रामक बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है लेकिन यहां पर ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है जो कि कभी भी हानिकारक साबित हो सकता है। सबसे आश्चर्य का विषय यह है कि शहर में लगातार रुक-रुक कर बारिश हो रही है किंतु प्रशासन चेत नहीं रहा है जो कि नागरिकों को पच नहीं रहा है। जानकारों का कहना हैं कि दवा के डालने से डेंगू,मलेरिया,चिकनगुनिया और फाइलेरिया जैसी घातक संचारी बीमारी का प्रभाव रुक जाता है इसके अलावा गंदे पानी में पनपने वाले मक्खी,कॉकरोच और अन्य जहरीले कीड़े नष्ट हो जाते हैं साथ ही नालियों से रेंगकर घरों के भीतर आने वाले कीड़ों की तादात कम हो जाती है। इन दवाओं को डालने से हानिकारक बैक्टीरिया में कमी आती है,गंदे पानी के सड़ने से पैदा होने वाली तीखी बदबू बहुत हद तक कम हो जाती है। अनदेखी करने के कारण भयंकर बदबू आ रही है और कीड़े-मकोड़े घरों के भीतर तक प्रवेश कर रहे हैं जिससे जनता बेहद नाराज है निगम का स्वास्थ्य विभाग नींद से जाग नहीं रहा है जो नागरिकों को रास नहीं आ रहा है।
