भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, के. कामराज 1903 से 1975 तमिलनाडु के महान स्वतंत्रता सेनानी पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राजनीति के पहले किंगमेकर थे । उनकी इस योजना के तहत उन्होंने खुद भी इस्तीफा दिया और लाल बहादुर शास्त्री, जगजीवन राम, मोरारजी देसाई तथा एसके पाटिल जैसे नेताओं ने भी सरकारी पद त्याग दिए । यही योजना कामराज प्लान के नाम से विख्यात हुई । कहा जाता है कि, कामराज प्लान की बदौलत वह केंद्र की राजनीति में इतनी मजबूत हो गए कि श्री नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनवाने में उनकी भूमिका रही । उस योजना का उद्देश्य था, बतौर पार्टी कांग्रेस को मजबूत करना पर वास्तव में उसने श्री नेहरू को अपनी नई टीम बनाने के लिए स्वतंत्र कर दिया था । जिसकी छवि 1962 के चीनी युद्ध के कारण धूमिल हुई । आज़ादी मिलने के बाद 13 अप्रैल 1954 को कामराज ने अनिच्छा में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद स्वीकार किया लेकिन प्रदेश को एक ऐसा नेता मिल गया जो उनके लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाने वाला था । उन्होंने प्रदेश की साक्षरता दर, जो कभी 7 प्रतिशत हुआ करती थी, को बढ़ाकर 37 प्रतिशत तक पहुंचा दिया ।
कामराज ने शिक्षा क्षेत्र के लिए कई अहम फैसला किया । उन्होंने निरक्षरता हटाने का वर्णन किया और कक्षा ग्यारहवीं तक निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा लागू कर दी । वह स्कूलों में गरीब बच्चों को मध्यान भोजन देने की योजना लेकर आए । उन्हीं के कार्यकाल के बाद से तमिलनाडु में बच्चे तमिल में शिक्षा हासिल कर सके हैं।
