भिलाई/प्राप्त जानकारीनुसार महादेव सट्टा सिंडिकेट मामले में विगत दिन जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर फरार कांग्रेस नेता राजेश गुप्ता व निशांत गुप्ता पर कानून का शिकंजा कसा गया जिसमें पिता राजेश गुप्ता रफूचक्कर होने में कामयाब रहा किंतु पुत्र निशांत गुप्ता सबूतमय धरा गया जो कि पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी कामयाबी रही किंतु उक्त कांग्रेस नेता के फरार होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शहर में चल रही है जिससे पुलिस विभाग की सार्वजनिक फजीहत हो रही है। यहां पर सवाल यह उठता है कि क्या राजेश गुप्ता और उसका पुत्र निशांत गुप्ता बिना किसी सहयोगी के ही इतनी बड़ी रकम को कालेधन से सफेद में तब्दील करते रहे यह कैसे संभव है? बिना किसी रैकेट के इतनी विशाल रकम का लेनदेन कैसे किया गया ? क्या उन्होंने इसमें ऐसे सफेदपोश लोगों का सहयोग लिया जिनके साथ उनका रोज उठना – बैठना था ? जिन पर शक की सुई कभी नहीं घूम सकती है। जानकार लोगों का कहना है कि कांग्रेस नेता राजेश गुप्ता का ऐसे ही सफेदपोश लोगों के साथ प्रतिदिन मिलना – जुलना था और उन लोगों ने भी काले धन को सफेद करने में सहयोग किया होगा जो कि आज मामला बढ़ता देख दूरी बनाकर बैठे हैं। यहां पर एक प्रश्न यक्ष की तरह यह भी खड़ा होता है कि निशांत गुप्ता ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस को किन-किन सफेदपोशो का नाम बताया और उस पर क्या कार्रवाई की गई ? दूसरी तरफ तत्कालीन थाना प्रभारी की भूमिका को लेकर भी लोग अनेक तरह के संदेह व्यक्त कर रहे हैं जब पुत्र की गिरफ्तारी हो सकती है तो पिता कैसे फरार हो सकता है ? आखिर उसको फरार होने का मौका किसने दिया और क्यों ? शहर में इस प्रकार की अनेक चर्चाएं आज भी जारी हैं। (उक्त समाचार जन चर्चा पर आधारित है)
