रिसाली/जिला अस्पताल दुर्ग के डॉक्टर,नर्स और ब्लड बैंक के अधिकारी की मानवता मर चुकी है यह बात तब सामने आई जब खून न मिलने पर एक युवती की मौत हो जाती है। खून न मिलने से कु. दीपिका गाड़ा की मौत हो चुकी हैं जिसकी पुनरावृत्ति ना हो इसलिए दोषियों पर कार्यवाही निहायत जरुरी है। साथियों मरौदा स्टेशन,वार्ड 17 नगर पालिका निगम रिसाली की एक लड़की जिसकी उम्र 22 वर्ष जो कि पढ़ाई करने वाली लड़की है जिसने बड़े बड़े सपने देखे होंगे जो पढ़ाई पूरी होने पर समाज की सेवा करना चाहती थी जिसकी तबियत बिगड़ने पर दुर्ग जिला अस्पताल मे भर्ती किया गया। डॉक्टर के कहने पर खून की जांच करवाया जाता हैं, जब खून की जांच होती है तो खून की कमी पाई जाती हैं और खुन चढ़ाने के लिए ब्लड बैंक में घर वाले गुहार लगाते हैं लेकिन वहां जाने पर कहते है कि पहले ब्लड डोनर लाओ तब ब्लड मिलेगा,परिवारजन के द्वारा ब्लड के लिए बहुत प्रार्थना करने के बाद भी ब्लड नहीं मिला तो लड़की के पिता अपना खून देने राजी हो गए इसके बावजूद ब्लड नही दिया गया आखिर क्यों ? इससे यह स्पष्ट होता हैं कि इनकी आत्मा मर चुकी हैं और मानवता के नाम पर ये लोग कलंक हैं इनको स्वास्थ सेवा में रहने का कोई हक नहीं है। वहां ड्यूटी पर तैनात नर्स की भी मानवता मर चुकी है जो सब कुछ देख कर भी अंजान बनी रही क्या इनको दंड नहीं मिलना चाहिए । इन लोगों ने मानवता को शर्मशार कर दिया है, डॉक्टर से संबंधित कार्यों को भगवान से जोड़ कर देखा जाता हैं भगवान भी इन लोगों को कभी माफ नहीं करेगा। वहां उपस्थित नर्स ने भी मानवता नही दिखाई बल्कि उल्टे कहा मशीन से खून नहीं बनता है और जो डॉक्टर रांउड पर आता है उसकी भी मानवता मर चुकी है उसने भी मरीज की जान की परवाह न करते हुए टरका दिया मजबूरी को नहीं समझा। अंत मे दूसरे दिन दुनिया को दिखाने के लिए जब लड़की की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ने लगी तो एक पर्ची मे जरूर लिखा कि ब्लड फ्री में दिया जाय लेकिन वह पर्ची लड़की के पिता को मिली ही नहीं। तब उस पर्ची का क्या मतलब निकला या फिर जो नर्स वहां पर मौजूद थी वो उस पर्ची के आधार पर ब्लड बैंक से ब्लड लाकर दे सकती थी अन्यथा लड़की के पिता को वह पर्ची देती किंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तब डॉक्टर के पर्ची लिखने का कोई मतलब नहीं निकला। यह बुरा हाल है दुर्ग जिला अस्पताल का, जहां पर गरीब लोग बड़े ही विश्वास के साथ अपना व अपने परिजनों का इलाज करवाने जाते हैं लेकिन इस लापरवाही ने सरकारी तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। यही कारण है कु. दीपिका गाड़ा की मौत हो जाती है, नाराज दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जिसकी वजह से जांच टीम मे एक वरिष्ठ डॉक्टर,एक डिप्टी कलेक्टर जांच करने लड़की के घर पर आई जहां मै भी मौजूद था दो घंटे टीम के साथ बैठकर एक एक बयान लिखा गया है लड़की के पिता,परिवार तथा मैं।जिसमे यह बात सामने आई की जिला अस्पताल मे मानवता मर चुकी है और व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही हैं लेकिन जिम्मेदारों के कानों में जूं नहीं रेंग रही हैं क्या यही सुशासन हैं? जांच के दौरान चंद्रकांत कोरे प्रवक्ता व मीडिया प्रभारी भिलाई जिला कांग्रेस कमेटी,श्रीमती जयंती महानंद, संतुदास मानिकपुरी हम तीनों ने इस जांच मे पूरा सहयोग किया डॉक्टर व डिप्टी कलेक्टर का। फिर दूसरे दिन दुर्ग ग्रामीण विधानसभा के पूर्व विधायक एवं पूर्व गृह लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू अपने कांग्रेस के वरिष्ठ साथियों के टीम के साथ लड़की के पिता को लेकर जिला कलेक्टर से मुलाकात किए और मांग रखे कि लड़की के परिवार मे से एक सदस्य को नौकरी दिया जाय और 50 लाख रुपये नगद मुआवजा दिया जावे। साथ ही दोषियों को कड़ी सजा दी जाए ताकि दुबारा इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो। इस प्रकार से कांग्रेस के वरिष्ठजनों ने यह फर्ज निभाया ताकि दीपिका गाड़ा को न्याय मिल सके इस दुखद घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं जिस जिला प्रशासन को संज्ञान लेने की आवश्यकता हैं। उक्त बातें अनौपचारिक रूप से चर्चा के दौरान चंद्रकांत कोरे,प्रवक्ता व मीडिया प्रभारी जिला कांग्रेस कमेटी भिलाई ने कही।
