भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि, भगवान परशुराम की जयंती 19 अप्रैल को हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है । यह पर्व भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी की जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिनका जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परशुराम जी का जन्म एक ऐसे समय में हुआ जब पृथ्वी पर धर्म और अन्याय बढ़ गया था । उन्होंने अत्याचारी क्षत्रियों का विनाश कर धर्म की स्थापना की और समाज में न्याय हुआ संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया। परशुराम जी को पराक्रम त्याग और सत्य के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है । उनके हाथ में धारण किया गया परसा (कुल्हाड़ी) उनके साहस और धर्म रक्षा के संकल्प का प्रतीक है । इस दिन लोग व्रत रखते हैं पूजा, अर्चना करते हैं तथा उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेते हैं ।
भगवान परशुराम जयंती हमें यहां प्रेरणा देती है कि हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े हो सत्य का साथ दे और अपने जीवन में धर्म अनुशासन एवं मर्यादा का पालन करें यह पर्व समाज में सद्भाव, साहस और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश देता है।
