भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि के पावन अवसर पर हम सभी महाराष्ट्र के नायक एवं स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं । उनका जन्म 1630 में हुआ था और उन्होंने अत्यंत कम आयु में ही अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष प्रारंभ कर दिया था । उनकी माता जीजाबाई से मिले संस्कारों और गुरु सम्राट रामदास के मार्गदर्शन ने उनके व्यक्तित्व को महान बनाया । शिवाजी महाराज ने मुगलों और अन्य शक्तियों के विरुद्ध साहसपूर्वक युद्ध करते हुए हिन्दीवि स्वराज की स्थापना की और 1674 में उनका राज्याभिषेक हुआ, जिससे मराठा साम्राज्य को एक सशक्त पहचान मिली।शिवाजी महाराज न केवल एक पराक्रमी योद्धा थे, बल्कि वे एक कुशल प्रशासक और दूरदर्शी शासक भी थे ।उन्होंने अपनी सेना और प्रशासन को संगठित किया, किलो का निर्माण और सुदृढ़ीकरण किया तथा समुद्री सुरक्षा के लिए नौसेना का भी विकास किया । उनकी नीतियां न्याय समानता और धार्मिक सहिष्णुता पर आधारित थी, जो उस समय के लिए अत्यंत प्रगतिशील थी । 3 अप्रैल 1680 को उनके निधन के साथ एक युग का अंत हुआ किंतु उनके आदर्श साहस और राष्ट्र प्रेम आज भी हमें प्रेरित करते हैं ।इस पुण्यतिथि पर हम संकल्प लेकर उनके दिखाएं मार्ग पर चलकर समाज और राष्ट्र की सेवा करेंगे।
