भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम कटने की आशंकाओं, संभावित तकनीकी गड़बड़ियों और सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल ? आखिर ऐसी गड़बड़ियां क्यों सामने आ रही हैं ? और इनकी जवाबदेही कौन तय करेगा? यदि किसी तकनीकी त्रुटि, गलत जानकारी या सत्यापन में चूक के कारण किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से कट जाता है, तो उसके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा? सरकार और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। मतदाता सूची में नाम होना प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार और निर्वाचन तंत्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित हो। यदि सॉफ्टवेयर या तकनीकी प्रणाली में कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो उसकी तत्काल जांच कराई जाए तथा प्रभावित मतदाताओं की समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए। जिन नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं या जिनके नाम को लेकर कोई आपत्ति अथवा विसंगति है, उन्हें उचित सूचना, अपना पक्ष रखने का अवसर और आवश्यक सुधार की सुविधा मिलनी चाहिए। सरकार आखिर यह स्पष्ट क्यों नहीं करती कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं? लोकतंत्र में मतदाता का अधिकार सर्वोपरि है। किसी भी पात्र नागरिक को तकनीकी खामी, प्रशासनिक लापरवाही या सत्यापन की त्रुटि के कारण मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधित करने की पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा की जाए तथा शिकायतों के निवारण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही, एसआईआर से संबंधित आपत्तियों और तकनीकी त्रुटियों पर निर्वाचन अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि आम नागरिकों का विश्वास बना रहे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती निष्पक्ष चुनाव और प्रत्येक पात्र मतदाता की भागीदारी में निहित है। मतदाता सूची में गड़बड़ी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और हर पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए।
