भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि, UPI आज आम आदमी, मजदूर, छोटे दुकानदार और गरीब परिवारों के रोजमर्रा के लेन-देन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। केंद्र सरकार के 15 सितंबर 2026 के स्पष्टीकरण के अनुसार ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI भुगतान निःशुल्क रहेंगे, जबकि कुछ ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेन-देन पर 0.4% MDR लागू होगा। सरकार के अनुसार लगभग 96% merchant transactions इससे अप्रभावित रहेंगे। आम जनता को UPI के नियमों की सही और सरल जानकारी मिलना बेहद जरूरी है, क्योंकि डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल अब गांव, शहर, बाजार, ठेले और छोटी दुकानों तक पहुंच चुका है। सरकार का कहना है कि MDR ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाना चाहिए और दुकानदारों द्वारा इसे ग्राहक पर डालने से रोकने के लिए बैंकों को निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि छोटे दुकानदारों और कम आय वाले लोगों से किसी भी प्रकार का छिपा हुआ या अनुचित अतिरिक्त शुल्क न लिया जाए और UPI से हर व्यक्ति या बुजुर्ग इसमें बस धोखा खा रहे है जिससे भारी नुकसानों और आर्थिक स्थिति में बहुत नुकसान हो रहा है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि किसी आम नागरिक या छोटे दुकानदार से UPI भुगतान के नाम पर गलत तरीके से अतिरिक्त पैसा लिया जाता है, तो उसकी शिकायत का तत्काल समाधान कैसे होगा? साथ ही उन्होंने मांग की कि UPI से जुड़े नियमों को स्थानीय और सरल भाषा में व्यापक रूप से समझाया जाए, शिकायतों के लिए आसान व्यवस्था बनाई जाए तथा गरीब और छोटे व्यापारियों को किसी भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाया जाए। डिजिटल भुगतान की सुविधा आम जनता के लिए सरल, सुरक्षित और पारदर्शी बनी रहे—सरकार को इस दिशा में स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए।
