भिलाई/प्राप्त जानकारीनुसार छोटे होटलो में जांच करना आसान दिखाई देता है, लेकिन बड़े और प्रभावशाली होटल संचालकों तक निगम की स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम क्यों नहीं पहुंचती, यह सवाल उठना स्वाभाविक है क्योंकि छोटों पर जुर्माना और बड़ों पर मेहरबानी यह कैसा इंसाफ हैं ? क्या बड़े और रसूखदार होटल जांच के दायरे से बाहर हैं? स्वास्थ्य विभाग को इस पर स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए। भिलाई के बड़े एवं स्टार होटलों में बिना पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण किया जाना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। जांच के दौरान किचन और स्टोर में रखी खाद्य सामग्री, एक्सपायरी डेट, मांस-मछली के रखरखाव, साफ-सफाई तथा खाद्य सुरक्षा लाइसेंस की जांच के साथ जरूरत के अनुसार खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला परीक्षण भी कराया जाना चाहिए। खाद्य सुरक्षा के नियम होटल के आकार, प्रतिष्ठा या संचालक की पहुंच देखकर तय नहीं हो सकते। भिलाई के बड़े होटलों के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जाए और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिले, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाए। जांच की निष्पक्षता का भरोसा तभी बनेगा, जब विभाग छोटे से लेकर बड़े हर प्रतिष्ठान तक समान रूप से पहुंचे। निगम के स्वास्थ्य विभाग को यह भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि अभी तक कितने बड़े होटलों में छापामार कार्रवाई की और उन पर कितना दंड लगाया या फिर मामला अंदरूनी साठगांठ से निपट गया।
