भिलाई/प्राप्त जानकारीनुसार जलभराव को लेकर जिला प्रशासन के द्वारा कड़े निर्देश दिए गए हैं और ठोस इंतजाम करने को कहा गया है किंतु धरातल में ऐसा होता दिखलाई नहीं पड़ रहा हैं क्योंकि जगह-जगह जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई है जिसको लेकर निगम प्रशासन के अधिकारी चुस्त दिखाई नहीं दे रहे हैं। छावनी चौक समीपस्थ वार्ड 33 में सुखपाल धर्मकांटा के सामने गड्ढों में पानी भरा हुआ हैं जिसकी वजह से आएं दिन दुर्घटनाएं घट रही हैं लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कुंभकरणीय नींद में सोए हुए हैं जिसके कारण स्थानीय दुकानदारों एवं राहगीरों में भारी आक्रोश व्याप्त हैं। यहां पर पिछले कई वर्षों से गड्ढे है जो कि बारह महीनों ऐसे ही उदास रहते हैं क्योंकि उनकी कोई मरम्मत नहीं कर रहा हैं। निगम अधिकारी समस्या पर ध्यान देने की जगह केवल खानापूर्ति करने में लगे रहते हैं जिसके परिणामस्वरूप समस्या बढ़ती ही जा रही हैं। खासकर बरसात के मौसम में पानी भर जाने से आवागमन में अत्यधिक परेशानी का सबब बन रहे हैं इन गड्ढों में पानी भर जाने के कारण साइकिल सवार और वाहनचालकों को अंदाजा नहीं लग पाता है कि कितना पानी भरा है और वे हादसों का शिकार हो जाते हैं,इन गड्ढों में बड़े-बड़े पत्थर होने की वजह से गाड़ी का संतुलन बिगड़ जाता हैं और चालक सम्भाल नहीं पाते जिससे कई लोग घायल भी हो चुके हैं। यहां पर गड्ढों ने छोटे तालाब का रूप ले लिया है जिसमें प्रतिदिन लोग गिर कर अपने कपड़ो के साथ-साथ हाथ-पैर भी खराब करवा रहे हैं तथा निगम के अधिकारी धृतराष्ट्र बने बैठे हैं। निगम अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगते देख एक दुकानदार ने स्वयं के पैसों से मलबा गिरवाकर अपने सामने समतल करवाया हैं इसके बावजूद अभी भी अनेक गड्ढे हादसों को बुलावा दे रहे हैं। यहां पर सवाल यह उठता है कि जलभराव का फंड कहां खर्च हो रहा हैं? इंडस्ट्रीज एरिया लगा होने के कारण सैकड़ों मजदूरों और मालवाहक गाड़ियों का आना जाना लगा रहता हैं,मालवाहक कभी भी पलट सकती हैं अगर ऐसा होता है तो जिम्मेदारी कौन लेगा?लोगों ने बताया कि अनेक बार इसकी शिकायत निगम प्रशासन से की जा चुकी मगर कोई सुधार नहीं आ रहा है ऐसा लगता बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा हैं।
