भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, 27 जून भारतीय साहित्य और राष्ट्रभक्ति के इतिहास का गौरवपूर्ण दिवस है । इस दिन महान साहित्यकार, पत्रकार, न्यायविद एवं बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती मनाई जाती है। उनका जन्म 27 जून 1838 को कांठलपाड़ा में हुआ था । वह भारत के प्रथम भारतीय स्नातकों में से एक थे तथा ब्रिटिश शासन काल में डिप्टी मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत रहे । उन्होंने अनेक प्रसिद्ध उपन्यासों की रचना की जिनमें दुर्गेशनंदिनी, कापालकुंडल और आनंदमठ विशेष रूप से उल्लेखनीय है । आनंद मठ में शामिल वंदे मातरम ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों देशवासियों में देशभक्ति और स्वाधीनता का उत्सव जगाया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था बल्कि वह राष्ट्रीय चेतना सामाजिक सुधार और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का सशक्त संदेश भी देता था । उनकी रचनाओं ने देशवासियों में आत्म गौरव, एकता और राष्ट्रीय प्रेम की भावना को सुदृढ़ किया l उनकी जयंती के अवसर पर हम उनके महान व्यक्तित्व एवं अमूल्य योगदान को नमन करते हैं तथा उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए सदैव समर्पित रहने का संकल्प लेते हैं l यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
