भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, छत्तीसगढ़ के पारंपरिक एवं लोकआस्था से जुड़े पावन पर्व कमरछठ तिहार के अवसर पर समस्त देशवासियों, प्रदेशवासियों एवं माताओं -बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
उन्होंने कहा कि कमरछठ, जिसे हलषष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए व्रत रखती हैं तथा भगवान बलराम एवं माता हलषष्ठी की पूजा-अर्चना करती हैं। छत्तीसगढ़ में इस पर्व को स्थानीय रीति-रिवाजों और पारंपरिक पूजा सामग्री के साथ विशेष रूप से मनाया जाता है। कमरछठ की सबसे विशेष पहचान यहां की लोकपरंपरा और प्राकृतिक जीवनशैली है। पूजा में पसहर चावल, छह प्रकार की भाजी, काशी घास, फूल-पत्तियां तथा अन्य पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। ग्रामीण अंचलों में महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा करती हैं और कमरछठ की कथा का श्रवण करती हैं। यह पर्व हमारी मिट्टी, प्रकृति, कृषि संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से गहराई से जुड़ा हुआ है। कमरछठ जैसे पारंपरिक पर्व हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता की पहचान हैं। ऐसे त्योहार नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, लोकपरंपराओं और संस्कारों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कामना की कि माता हलषष्ठी की कृपा से सभी परिवारों में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे तथा सभी माताओं की संतानें स्वस्थ एवं दीर्घायु हों। इस पावन अवसर पर उन्होंने समस्त देशवासियों एवं प्रदेश की माताओं-बहनों को कमरछठ तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
