भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, हॉकी के महान खिलाड़ी और देश के गौरव मेजर ध्यानचंद की जयंती पर उन्हें सादर नमन करते हुए कहा कि ध्यानचंद ने अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा और समर्पण से भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया। 29 अगस्त 1905 को जन्मे मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है।
साधारण शिक्षा प्राप्त करने के बाद 16 वर्ष की अवस्था में 1922 ईस्वी में दिल्ली में प्रथम ब्रह्मांड रेजीमेंट में सेवा में एक साधारण सिपाही की हैसियत से भर्ती हो गए । जब फर्स्ट ब्रह्मांड रेजीमेंट में भर्ती हुए उस समय तक उनके मन में हॉकी के प्रति कोई विशेष दिलचस्पी यह रूचि नहीं थी। ध्यानचंद को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित करने का श्रेय रेजीमेंट के एक सूबेदार मेजर तिवारी को है । मेजर तिवारी स्वयं भी प्रेमी और खिलाड़ी थे। मेजर ध्यानचंद की हॉकी पर ऐसी शानदार पकड़ थी कि वे गेंद को अपने नियंत्रण में रखते हुए मैदान पर असाधारण प्रदर्शन करते थे।
मेजर ध्यानचंद ने भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के स्वतंत्र होने पर सन 1948 ईस्वी में कप्तान बना दिए गए । केवल हॉकी के खेल के कारण ही सेवा में उनकी पदोन्नति होती गई 1938 में उन्हें वायसराय का कमीशन मिला और वह सूबेदार बन गए उसके बाद एक के बाद एक दूसरे सूबेदार लेफ्टिनेंट और कैप्टन बनते चले गए बाद में उन्हें मेजर बना दिया गया । उनके नेतृत्व में भारत ने 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया। उनका जीवन अनुशासन, मेहनत, देशभक्ति और खेल भावना की प्रेरणादायी मिसाल है। उनकी स्मृति में हर वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद की उपलब्धियां आज भी देश के खिलाड़ियों और युवाओं को निरंतर मेहनत कर देश का गौरव बढ़ाने की प्रेरणा देती हैं।
