भिलाई/प्राप्त जानकारीनुसार वार्ड 33, संतोषी पारा स्थित महिला समृद्धि बाजार के प्रवेश द्वार पर ही कचरे और मलबे का देर लगा हुआ हैं साथ-ही-साथ जलभराव भी है जो कि पिछले 10-12 दिनों से ज्यों का त्यों पड़ा हुआ हैं जो कि लोगों को रास नहीं आ रहा हैं और दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। सबसे हैरत की बात यह है कि इससे चंद दूरी पर ही स्वास्थ्य विभाग का कार्यालय है एवं इस मार्ग से विभागीय अधिकारियों- कर्मचारियों का आना-जाना लगा रहता हैं इसके बावजूद मलबा और कचरे का अंबार पड़े-पड़े सड़ रहा हैं। यहां पर आसपास घनी आबादी निवासरत हैं तथा आंगनबाड़ी इत्यादि भी संचालित हो रहे हैं,बारिश में जलभराव के कारण मच्छरों का आतंक छाया हुआ हैं एवं ठहरा हुआ पानी धीरे-धीरे महिला समृद्धि बाजार में रहने वाले लोगों के घरों में धरातल से रिस रहा हैं और कचरा भयंकर सड़ांध बदबू मार रहा हैं जिससे स्थानीय लोगों का जीना- खाना मुश्किल हो गया है। प्रवेश द्वार के ठीक सामने प्राइवेट स्कूल है जहां पर प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-छोटे बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं ऐसे में उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। पता नहीं क्यों निगम प्रशासन के अधिकारी धृतराष्ट्र बने बैठे हैं? क्या उनको किसी बड़ी बीमारी का इंतजार है?उक्त बाजार से सटकर ही वार्ड 32 बैकुंठधाम हैं जहां पर सैकड़ों की संख्या में लोग रहते हैं। ऐसे में अगर साफ-सफाई के अभाव में डेंगू,मलेरिया जैसी घातक बीमारी फैल जाए तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? मलबा कई दिनों से पड़ा रहने से मिट्टी बंजर हो जाती हैं क्योंकि सीमेंट में मौजूद केमिकल मिट्टी में मिल जाते हैं इससे मिट्टी का पीएच स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता हैं जिससे मिट्टी क्षारीय हो जाती हैं और वह बंजर होने लगती हैं। रेत और सीमेंट के बारीक कण मिट्टी के छिद्रो को बंद कर देते हैं इससे मिट्टी के अंदर हवा और पानी का जाना बंद हो जाता हैं जिससे मिट्टी में मौजूद जरूरी केंचुए और सूक्ष्म जीव मर जाते हैं। पेड़ पौधों पर बुरा असर पड़ता हैं अगर उस जगह पर घास या छोटे पौधे हैं तो धूप और हवा न मिलने से वे कुछ दिनों में ही पूरी तरह सड कर नष्ट हो जाते हैं। आसपास के बड़े पेड़ों की जड़ों तक पानी पहुंचना रुक जाता हैं जिससे उनकी ग्रोथ रुक जाती हैं। सुबह की ओस,नमी या हल्की बारिश होने पर सीमेंट कड़ा हो जाता हैं रेत और गिट्टी के साथ मिलकर यह जमीन के ऊपर एक कड़क कंक्रीट की परत बना लेता हैं। मलबे वाली जगह बारिश के पानी को सोख नहीं पाती हैं जिससे वहां पर पानी जमा होने लगता हैं। हवा चलने पर रेत और सीमेंट के बारीक कण उड कर घरों और फेफड़ों तक पहुंचते हैं जिससे सांस की बीमारी का खतरा बना रहता हैं। इतने नुकसान होने के बावजूद निगम प्रशासन हाथ- पर-हाथ धर कर बैठा हुआ हैं यहां पर मलबा गिराने वाले पर क्या कार्यवाही करने की हिम्मत जुटा पाएगा निगम प्रशासन? एक तरफ जलभराव,कचरे और मलबे से आमजनता अत्यधिक चिंतित हैं वहीं दूसरी तरफ जमीन और स्वास्थ्य दोनों खराब हो सकते हैं। अब देखना यह हैं कि निगम प्रशासन क्या कार्रवाई करता हैं? या फिर अंदरूनी साठगांठ से मामला सुलट जाता हैं।
