भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, आज महान समाज सुधारक, शिक्षाविद् एवं भारतीय जागरण के अग्रदूत राजा राममोहन राय की जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई जाती है l उनका जन्म 22 मई 1772 को बंगाल के राधा नगर गांव में हुआ था । उन्हें आधुनिक भारत का जनक तथा भारतीय पुनर्जागरण का पिता कहा जाता है । राजा राममोहन राय ने भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष किया । उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह, अंधविश्वास एवं जातिगत भेदभाव का खुलकर विरोध किया तथा महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा को बढ़ावा दिया। उनके अथक प्रयासों से सती प्रथा के उन्मूलन के महत्वपूर्ण सफलता मिली ।
उन्होंने वर्ष 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य समाज में धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक सुधार और आधुनिक शिक्षा का प्रचार करना था । वह संस्कृत, फारसी, अरबी एवं अंग्रेजी भाषा के विद्वान थे तथा आधुनिक शिक्षा के समर्थक थे । इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि राजा राममोहन राय के विचार आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं हमें उनके आदर्शों को अपनाकर सामाजिक समानता, शिक्षा एवं मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाना चाहिए l उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।
