भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि, 9 मई भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी प्रथम राष्ट्रवादी, चिंतक, समाज सुधारक, शिक्षाविद् एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तेजस्वी नेता गोपाल कृष्ण गोखले की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन । गोपाल कृष्ण गोखले ने अपने ज्ञान, सादगी, दूरदर्शिता और राष्ट्र सेवा के अद्भुत विचारों से भारतीय राजनीति को नहीं दिशा प्रदान की । वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उन महान नेताओं में थे जिन्होंने देश में लोकतंत्र, सामाजिक समानता और शिक्षा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाए । गोखले 1889 में समाज सुधारक महादेव, गोविंद रानाडे के संरक्षण में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने । बाल गंगाधर तिलक, दादाभाई नौरोजी, विपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय और एनी बेसेंट जैसे अन्य समकालीन नेताओं के साथ गोखले में आम भारतीयों के लिए अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सार्वजनिक मामलों पर अधिक अधिकार प्राप्त करने के लिए दशकों तक संघर्ष किया । उन्होंने हमेशा संविधान, संवाद और शांतिपूर्ण मार्ग से देश हित की लड़ाई लड़ी । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानते थे और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते थे । गोखले जी का संपूर्ण जीवन त्याग, सेवा, नैतिकता और देशभक्ति का अनुपम उदाहरण रहा । उन्होंने ‘ सर्वेंट आफ इंडिया सोसाइटी’ की स्थापना कर युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया । आज उनकी जयंती केवल एक स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपनाकर देश को शिक्षित सशक्त और एकजुट बनाने का संकल्प लेने का दिन है और राष्ट्रीय हित जन सेवा के मार्ग पर आगे बढ़े । ऐसे महान विभूति को विनम्र श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन।
