महासमुंद/महावीर जयंती के अवसर पर जैन समाज के तत्वधान मे भव्य शोभायात्रा निकाली गईं । जिसमे रास्ट्रीय तेली कर्मा सेना के संस्थापक व भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश के कार्य समिति सदस्य अशवंत तुषार साहू शामिल हुआ, यह शोभायात्रा मंदिर, गांधी चौक से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से जैन मंदिर मे पहुंचकर सम्पन्न हुई। सुबह से ही शहर में उत्साह का माहौल था। जिनमें समाज के युवा, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हुए। लोग अहिंसा, संयम और अच्छे आचरण के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे, जिससे पूरे शहर में धार्मिक वातावरण बन गया।
भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे, जो ‘अहिंसा परमोधर्म’ (अहिंसा ही सर्वोच्च धर्म है) के पुजारी थे। उन्होंने न केवल मनुष्यों बल्कि सूक्ष्म जीवों के प्रति भी करुणा, प्रेम और रक्षा का संदेश दिया। उनका मानना था कि आत्म-संयम, सदाचार, और सत्य के मार्ग पर चलकर ही मुक्ति (निर्वाण) प्राप्त की जा सकती है। महावीर स्वामी और अहिंसा के मूल सिद्धांत: जियो और जीने दो: महावीर स्वामी ने “जियो और जीने दो” का सिद्धांत दिया, जो समानता और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देता है।, उन्होंने सिखाया कि किसी भी त्रस जीव (एक से पांच इंद्रिय वाले जीव) की हिंसा न करें और न ही दूसरों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।
