भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि, आज छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस 11 मार्च पर धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए उनके सर्वोच्च त्याग 1689 को नमन करते हुए एक भव्य श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं शंभूराजे ने औरंगजेब की यात्राओं को सहकर भी धर्म नहीं बदला लिए इस वीर योद्धा के साहस को याद करें । संभाजी महाराज शिवाजी महाराज के पुत्र थे जिन्होंने 9 साल तक औरंगजेब की विशाल सेना का सामना किया 11 मार्च 1689 को भीषण यातनाएं आंखें फोड़ना, शरीर की खाल उतारना, झेलने के बाद भी उन्होंने मुगलों के सामने घुटने नहीं टेके और ना ही धर्म बदल जिसे आज भी धर्मवीर के रूप में याद किया जाता है । उनका बलिदान मराठों को और अधिक आक्रामक बना गया जिसके बाद मराठा साम्राज्य ने औरंगजेब को अन्ततः धूल चटाई। स्वराज के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले छत्रपति संभाजी महाराज जी ने भारतीय इतिहास पर अमिट छाप छोड़ी। अत्याचारी शक्तियों से अपनी अंतिम सांस तक स्वराज स्वधर्म और स्वाभिमान की रक्षा करने वाले छत्रपति संभाजी महाराज का जीवन देश की युवा पीढ़ी को देशभक्त, सर्वोच्च बलिदान देने वाले छत्रपति संभाजी महाराज ने भारतीय इतिहास पर अमिट छाप छोड़े । अत्याचारी शक्तियों से अपनी अंतिम सांस तक स्वराज स्वधर्म और स्वाभिमान की रक्षा और निस्वार्थ सेवा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा त्याग और धर्म निष्ठा के प्रति छत्रपति संभाजी महाराज जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
