जगदलपुर/महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के बस्तर प्रवास का स्वागत करते हुए बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश उपाध्यक्ष नवनीत चाँद ने राष्ट्रपति एवं छत्तीसगढ़ के राज्यपाल से बस्तर के जनजातीय अधिकारों और विकास योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ गठन के बाद 26 वर्षों में बस्तर में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ी हैं, लेकिन स्थानीय रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, सिंचाई और पुनर्वास के वास्तविक परिणामों का सार्वजनिक आकलन जरूरी है। बस्तर का विकास केवल खनिज उत्पादन और निवेश से नहीं, बल्कि स्थानीय जनता को मिले लाभ से मापा जाए।
“””पांच प्रमुख मांगें”””: जनजातीय अधिकार एवं TAC: जनजातीय सलाहकार परिषद की विशेष बैठक बुलाकर वर्ष 2000 से अब तक जनजातीय कल्याण योजनाओं के बजट, खर्च और परिणामों की समीक्षा सार्वजनिक की जाए। पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम के लागू प्रावधानों का पालन सुनिश्चित हो।स्थानीय रोजगार एवं औद्योगिक जवाबदेही: NMDC, नगरनार स्टील प्लांट और अन्य उद्योगों में स्थानीय युवाओं की नियमित भर्ती, रिक्त पदों तथा ठेका श्रमिकों के आंकड़े सार्वजनिक हों। स्थानीय व्यवसायियों और उद्यमियों को पारदर्शी अवसर मिलें। शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बुनियादी सुविधाएं: विद्यालयों, छात्रावासों, शिक्षकों, चिकित्सकों और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता का तुलनात्मक आकलन कर समयबद्ध सुधार योजना बनाई जाए। सड़क, रेल, हवाई संपर्क, पेयजल, बिजली और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की स्पष्ट कार्ययोजना बने।
जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण एवं पुनर्वास: औद्योगिक परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, पेड़ कटाई, पर्यावरणीय स्वीकृति और ग्रामसभा की वैधानिक भूमिका की समीक्षा हो। पोलावरम सहित अन्य परियोजनाओं तथा नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और आजीविका के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
संस्कृति एवं जनभागीदारी: बस्तर दशहरा, मुरिया दरबार, देवगुड़ियों और पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं के संरक्षण के लिए पर्याप्त बजट और स्थानीय समाज की भागीदारी सुनिश्चित हो। नवनीत चाँद ने कहा कि राष्ट्रपति एवं राज्यपाल का बस्तर प्रवास केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि जनजातीय अधिकारों, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास के सवालों पर ठोस पहल का अवसर बने। प्रत्येक प्रमुख मांग के लिए जिम्मेदार विभाग, निर्धारित बजट, समय-सीमा और सार्वजनिक प्रगति रिपोर्ट तय की जाए। बस्तर को खनिज संसाधन देने वाले क्षेत्र से आगे बढ़ाकर स्थानीय युवाओं को रोजगार, जनता को बेहतर सुविधाएं और आदिवासी समाज को अपने संवैधानिक अधिकारों का वास्तविक लाभ देने वाला क्षेत्र बनाना ही विकास की कसौटी होनी चाहिए।
