भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, हिंदी साहित्यकार एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सेठ गोविंद दास की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित । सेठ गोविंद दास का जन्म 16 अक्टूबर 1896 को जबलपुर में हुआ था। वे महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हुए और असहयोग आंदोलन सहित देश की आजादी के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने त्याग, संघर्ष और राष्ट्रप्रेम से देशवासियों को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया। हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति उनका समर्पण भी उल्लेखनीय रहा। उन्होंने नाटकों, कहानियों और अन्य साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सुधार और देशभक्ति की भावना को मजबूत किया। सेठ गोविंद दास का जीवन राष्ट्रसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के रूप में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और देश के लोकतांत्रिक विकास में योगदान दिया। हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के प्रयासों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही तथा वे हिंदी के प्रचार-प्रसार के प्रबल समर्थक थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि देश की एकता, स्वतंत्रता, भाषा और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। सेठ गोविंद दास के आदर्श आज भी देशवासियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जनसेवा, राष्ट्रीय एकता तथा संविधान के मूल्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देते हैं।
