भिलाई/छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र ताम्रकार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि छत्तीसगढ़ में काफी वर्षों से सेवाएं दे रहे प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को लेकर चलाये जा रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि राज्य सरकार को इस गंभीर विषय को व्यवहारिक दृष्टिकोण और मानवीय तथा संवेदनशील तरीके से हल करना चाहिए जानकारी के अनुसार टीईटी से सबंधित मूल प्रावधान एनसीटीई की 23 अगस्त सन 2010 की अधिसूचना से लागू हुआ था इसके बाद वर्ष 2017 में आरटीई अधिनियम में संशोधन कर 31 मार्च 2015 तक नियुक्ति या सेवारत शिक्षकों को न्यूनतम योग्यता हासिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था अब वर्तमान में इन शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक निर्धारित किया गया है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि अमीर चंद अरोरा एवं छत्तीसगढ़ चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स भिलाई के संरक्षक तथा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता लल्लन तिवारी ने कहा है कि केवल टीईटी परीक्षा पास कर लेना ही किसी शिक्षक की योग्यता की गारंटी नहीं है और न ही परीक्षा में पास नहीं हो पाना किसी को अयोग्य साबित करता है क्यों कि शिक्षक की वास्तविक दक्षता में उनका दसों वर्षों का स्कूल में पढ़ाने का अनुभव एवं विषयों का मुख्यता व्यवहारिक ज्ञान तथा शिक्षण पद्धति मुख्य होती है और ऐसे में कई वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों के अनुभव को केवल एक परीक्षा के आधार पर उनका आंकलन करने को सर्वथा अनुचित ही नहीं बल्कि उनकी कड़ी मेहनत को अयोग्यता समझना भी गलत है और जिसके कारण शिक्षकों को भय एवं असमंजस की स्थिति से बाहर निकालने के लिए कांग्रेस के नेताओं ने राष्ट्रपति एवं राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग किया है कि सरकार को व्यवहारिक प्रशिक्षण की तैयारी करानी चाहिए और जिला तथा ब्लॉक स्तर पर विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाकर शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धति, तथा डिजिटल शिक्षा एवं कक्षा प्रबंधन और शैक्षणिक नवाचारों के बारे में भी प्रशिक्षित किया जाना चाहिए जिससे शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी समुचित लाभ मिल सके, कांग्रेस के नेताओं ने कहा है कि राज्य और केंद्र दोनों में एक ही दल की सरकार है और ऐसे में भाजपा सरकार को शिक्षकों के हित में सकारात्मक पहल करते हुए राज्य के विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजकर नियमों में आवश्यक संशोधन कराकर सेवारत शिक्षकों को राहत देने के मांग की है क्योंकि चिंता इस बात की है कि कई शिक्षक सेवानिवृत्तिक करीब हैं और ऐसे समय पर उनकी नौकरी पर संकट खड़ी करना उनके साथ अन्याय से कम नहीं है इसलिए शिक्षकों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं करने का सरकार से अनुरोध किया है ताकि अपनी बची नौकरी को बिना किसी भय एवं डर पूरी करके अपने परिवार को सुचारू रूप से चला सके।
