भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हुए कहा है कि, 1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी रिफिल के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किए जाने की व्यवस्था को लेकर गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के हित में पर्याप्त सहायता और स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है । सरकारी जानकारी के अनुसार 19 सितंबर तक 27.43 करोड सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ता बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा कर चुके हैं । इसके बावजूद जिन परिवारों का प्रमाणीकरण अभी बाकी है उनके सामने समय पर प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है। विशेष कर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्ग, दिव्यांग, कम आय वाले परिवार तथा डिजिटल सुविधाओं से दूर उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी ना हो । इसके लिए एलपीजी एजेंसी और प्रशासन को पर्याप्त सहायता उपलब्ध करानी चाहिए । सरकार से प्रमुख सवाल – 1. यदि किसी गरीब उपभोक्ता का बायोमेट्रिक सत्यापन तकनीकी कारणों से नहीं हो पता है तो उसके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी ? 2. बुजुर्ग, दिव्यांग और दूर दराज के ग्रामीण उपभोक्ताओं को सत्यापन केंद्र तक पहुंचने में परेशानी होने पर क्या घर-घर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी? 3. यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल तकनीकि या दस्तावेज संबंधी समस्या के कारण कोई पत्र परिवार एलपीजी सब्सिडी के लाभ से वंचित न हो सरकार की जिम्मेदारी है की नई व्यवस्था लागू करते समय पात्र गरीब परिवारों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो। इसलिए प्रत्येक एलपीजी उपभोक्ता को पर्याप्त समय, सहायता और शिकायत निवारण की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। हम मांग करते हैं कि, बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और जिन पात्र परिवारों का सत्यापन किसी तकनीकी कारण से नहीं हो पा रहा है उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था स्पष्ट रूप से सार्वजनिक की जाए।
