भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, आचार्य विनोबा भावे की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन । विनोबा भावे का जीवन सत्य, अहिंसा, सेवा और त्याग की प्रेरणादायी मिसाल है। उनका जन्म 11 सितंबर 1895 को महाराष्ट्र के गागोड़े गांव में हुआ था। वे महात्मा गांधी के प्रमुख अनुयायियों में से एक थे और स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ समाज सुधार के कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आचार्य विनोबा भावे ने समाज में समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने वर्ष 1951 में तेलंगाना के पोचमपल्ली से भूदान आंदोलन की शुरुआत की। इस आंदोलन के माध्यम से उन्होंने भूमिहीन गरीबों के लिए संपन्न किसानों और जमींदारों से स्वेच्छा से भूमि दान करने का आह्वान किया। आगे चलकर यही आंदोलन ग्रामदान और सामाजिक परिवर्तन के व्यापक अभियान में परिवर्तित हुआ। आचार्य विनोबा भावे का जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका मानना था कि प्रेम, अहिंसा, करुणा और आपसी सहयोग के माध्यम से समाज में स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है। उनके महान विचार और मानव सेवा की भावना आने वाली पीढ़ियों को हमेशा सत्य, सादगी और सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती रहेगी। उनकी जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।
