भिलाई/सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार वार्ड 30 का प्रगति नगर पीडीएस चावल के तस्करी का अड्डा बना हुआ है यहां पर पिछले कई वर्षों से धड़ल्ले से तस्करी चल रही है जो कि रुकने का नाम नहीं ले रही है बेखौफ तस्कर अवैध कार्य को अंजाम दे रहे हैं। उक्त वार्ड में अनेक सालों से तस्कर के द्वारा बिना किसी डर भय के सरेआम चावल तस्करी की जाती है जो कि अपनी राजनीतिक पहुंच के चलते कार्य को निरंतर अंजाम दें रहे है। कहा जा रहा है कि इसमें कुछ राजनीतिक लोग भी शामिल हैं जिनको कि हर माह हिस्सा मिलता है। इस तस्करी का सरगना एक राजनीतिक व्यक्ति को बताया जा रहा है जो की एक राजनीतिक दल का बड़ा पदाधिकारी है।पूर्व में नीली ऑटो बड़ी फेमस हुआ करती थी जो कि अब बंद गाड़ी का रूप धारण कर ली है इसमें चावल लोड किया जाता है ताकि किसी को कोई शक ना हो। दिन भर चावल इकट्ठा करने के बाद प्रतिदिन शाम को 8-10 ऑटो चावल लेकर निकलती हैं। जो कि कैंप से होकर कोहका अवंती बाई चौक से राइस मिलों तक पहुंचती है, दूसरी रोड यह है कि कैंप से होकर अवंती बाई चौक होते हुए सीधे सीएम मेडिकल कॉलेज वाली रोड से जाती है। यहां पर सवाल यह उठता है कि इतने सालों से निरंतर चावल तस्करी करने वालों पर जिला प्रशासन मेहरबान क्यों है? सूत्रों का कहना है कि एक ऑटो चावल की कीमत लगभग 70 हजार रुपए हैं और दिन भर में 8-10 ऑटो निकलता है इस हिसाब से प्रतिदिन का 6 से 7 लाख रुपए होता है इससे आप महीने भर की कमाई का अंदाजा लगा सकते हैं। प्रगति नगर पिछले कई वर्षों से पीडीएस चावल का गोदाम बना हुआ है जहां पर चावल इकट्ठा किया जाता है और इसकी खबर जनप्रतिनिधियों को ना हो, ऐसा संभव ही नहीं है किंतु जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए हैं जो की समझ से परे हैं। अवैध चावल तस्करी के मामलों में पुलिस प्रशासन के हाथ बंधे हुए हैं उन्हें कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है जिसका तस्कर भरपूर फायदा उठा रहे हैं इन सब मामलों में खाद्य विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है किंतु वह भी धृतराष्ट्र बना बैठा हुआ हैं जब भी कोई गाड़ी पकड़ाती है तो खाद्य विभाग के लोग पीडीएस चावल होने से मना कर देते हैं जो कि अंदरूनी साठगांठ होने के कारण तस्करों को बचा लेते हैं और इन अवैध कार्यों को बढ़ावा दे रहे हैं।
