भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, 23 मई को गौतम बुद्ध के पावन जयंती श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई जाती है । इस अवसर पर भगवान बुद्ध के जीवन उनके उपदेशों एवं मानव कल्याण हेतु दिए गए संदेशों का स्मरण किया जाता है । भगवान गौतम बुद्ध का जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व नेपाल के लुंबिनी में राजा शुद्धोधन एवं माता महामाया के यहां हुआ था । उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ तथा सांसारिक दुखों को देखकर उन्होंने राजमहल त्याग दिया और कठोर तपस्या की पश्चात बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया । ज्ञान प्राप्ति के बाद में बुद्ध कहलाए उन्होंने संसार को अहिंसा, करुणा, सत्य, शांति एवं मध्यम मार्ग का संदेश दिया । उनके उपदेश आज भी मानवता को सही दिशा प्रदान करते हैं । बुद्ध का मुख्य उद्देश्य संदेश था कि जीवन दुखों से भरा है और इन दुखों का कारण इच्छा या तृष्णा है । उन्होंने सत्य, अहिंसा और मध्यम मार्ग का उपदेश दिया उन्होंने कहा कि हमें कोई नहीं बचा सकता शिवाय हमारे खुद के।इस पावन अवसर पर प्रातः प्रभात फेरी, बुद्ध वंदना, दीप प्रज्वलन विचार, विचार गोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है । यह त्योहार भारत, नेपाल, श्रीलंका, वियतनाम और चीन समेत दुनिया के कई देशों में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है इस दिन लोग उनके विचारों को अपनाकर अपने जीवन को सार्थक बनाने का संकल्प लेते हैं।
