भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि, 13 अप्रैल 1919 का दिन भारतीय इतिहास में एक अत्यंत दुखद और क्रूर घटना के रूप में याद किया जाता है, जिसे जलियांवाला बाग दिवस के नाम से जाना जाता है । यह घटना अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुई जहां हजारों लोग बैसाखी के अवसर पर एकत्रित हुए थे उसी समय ब्रिटिश सरकार ने रोलेट एक्ट लागू किया था, जिसके खिलाफ लोग शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे । इसी दौरान ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर ने बिना चेतावनी दिए निहत्ती भीड़ पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया, जिससे सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हुए। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी । भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस नरसंहार की कड़ी निंदा की और इसकी जांच के लिए आंदोलन चलाया । महात्मा गांधी ने इसके विरोध में असहयोग आंदोलन शुरू किया, जिससे आजादी की लड़ाई और तेज हो गई कांग्रेस के नेताओं ने इस घटनाओं को ब्रिटिश शासन की क्रूरता का प्रतीक बताते हुए देशवासियों को एकजुट होने का आह्वान किया। आज 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि इस दुखद घटना में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी जा सके और हमें स्वतंत्रता के महत्व का एहसास होता रहे । देश की आजादी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का बहुत बड़ा योगदान रहा।
