जगदलपुर/बस्तर में लगातार भारी बारिश और इंद्रावती नदी के बढ़ते जलस्तर से जगदलपुर सहित अनेक शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति बनी हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के जगदलपुर केंद्र के अनुसार 25 सितंबर को पिछले 24 घंटों में 246.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि इसके बाद भी बारिश एवं जलभराव की स्थिति बनी रही। राज्य के कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत अभियान भी जारी हैं। बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) द्वारा मुख्य संयोजक एवं बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद के नेतृत्व में राहत प्रतिनिधिमंडल प्रभावित क्षेत्रों—प्रवीण वार्ड, महादेव घाट, धरमपुर, लालबाग सहित अन्य जलभराव वाले क्षेत्रों—का लगातार निरीक्षण कर रहा है। टीम द्वारा प्रभावित परिवारों की समस्याएं दर्ज करने के साथ भोजन, पेयजल एवं आवश्यक राहत सहायता पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है तथा गंभीर परिस्थितियों की जानकारी संबंधित प्रशासन तक पहुंचाई जा रही है।”””सवाल बारिश पर नहीं, जोखिम कम करने की तैयारी पर है”””:छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की व्यवस्था में बाढ़-प्रवण क्षेत्रों की पहचान/मैपिंग, शहरी बाढ़ तैयारी, जिला नियंत्रण कक्ष, पूर्व-तैयारी तथा राहत-प्रबंधन को महत्वपूर्ण घटक माना गया है। SDMA यह भी स्पष्ट करता है कि आपदा प्रबंधन का उद्देश्य विकास योजनाओं में आपदा-जोखिम न्यूनीकरण को शामिल करना तथा जीवन एवं संपत्ति के नुकसान को कम करना है। इसी आधार पर प्रशासन, नगर प्रशासन एवं राज्य सरकार से निम्न तकनीकी एवं सत्यापन योग्य सवाल हैं— (“””7 सवाल जिनका आधिकारिक जवाब जरूरी है”””): 1.वर्षा एवं जलस्तर:
जगदलपुर एवं बस्तर के प्रभावित क्षेत्रों में 25–27 सितंबर के दौरान स्थानवार वर्षा, नदी जलस्तर एवं चेतावनी स्तर का आधिकारिक आंकड़ा क्या है?
2.””Flood Risk Mapping”””: जगदलपुर के वर्तमान बाढ़/जलभराव-प्रवण वार्डों एवं गांवों की आधिकारिक सूची और जोखिम मानचित्र उपलब्ध है या नहीं?
3.”””Drainage Capacity””: प्रमुख नालों, स्टॉर्म-वॉटर ड्रेनेज, पुलियों एवं आउटफॉल की डिजाइन क्षमता, कैचमेंट क्षेत्र और वास्तविक जलनिकासी क्षमता का तकनीकी परीक्षण कब हुआ? 4.”””Hydraulic Audit:
क्या पूरे जगदलपुर ड्रेनेज नेटवर्क का स्वतंत्र””””: हाइड्रोलॉजिकल/हाइड्रोलिक ऑडिट हुआ है? यदि नहीं, तो इसकी समयसीमा क्या है? 5. “”सार्वजनिक धन का परिणाम””: पिछले वर्षों में जलनिकासी, नाला निर्माण, पुलिया एवं बाढ़ नियंत्रण पर स्वीकृत राशि, निविदा, कार्यादेश, व्यय, पूर्णता प्रमाणपत्र और वर्तमान स्थिति क्या है? 6. “”पूर्व-तैयारी””: जिला आपदा प्रबंधन योजना के तहत भारी बारिश से पहले चेतावनी, निकासी, राहत शिविर, नाव/रेस्क्यू संसाधन, भोजन -पेयजल, दवा एवं संचार व्यवस्था की क्या तैयारी की गई थी? 7.””स्थायी समाधान””: बार-बार जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए DPR, लागत, बजट, कार्य एजेंसी और समयसीमा सहित स्थायी समाधान योजना कब तक सार्वजनिक होगी?””””तत्काल 5 मांगें”””: ① वैज्ञानिक क्षति सर्वे:
प्रत्येक प्रभावित घर, परिवार, खेत, फसल, पशुधन तथा सार्वजनिक अधोसंरचना का संयुक्त, पारदर्शी एवं सत्यापन योग्य सर्वे कराया जाए। ② पात्रों को समयबद्ध सहायता:
प्रचलित शासन नियमों एवं लागू राहत मानकों के अनुसार पात्र प्रभावित परिवारों एवं किसानों को समयबद्ध सहायता दी जाए। छत्तीसगढ़ SDMA के अनुसार SDRF अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं में निर्धारित मानकों के तहत तत्काल सहायता के लिए प्रयुक्त होता है।
③ जगदलपुर Drainage Audit:
पूरे शहरी जलनिकासी तंत्र का स्वतंत्र Hydrological/Hydraulic एवं Structural/Technical Audit कराया जाए तथा उसकी प्रमुख निष्कर्ष रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
④ GIS आधारित Flood Risk Map:
जलभराव वाले क्षेत्रों, प्राकृतिक जलप्रवाह, नालों, आउटफॉल, पुलियों और संवेदनशील आबादी का GIS आधारित जोखिम मानचित्र तैयार किया जाए।
⑤ Urban Flood Resilience Plan:
जगदलपुर के लिए Urban Flood & Drainage Resilience Plan तैयार कर उसकी DPR, लागत, वित्तीय स्रोत, कार्य एजेंसी, समयसीमा एवं प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।””””राहत कार्य जारी, जवाबदेही की मांग भी जारी”””: नवनीत चाँद ने कहा कि वर्तमान प्राथमिकता प्रभावित नागरिकों तक भोजन, पेयजल, दवा एवं सुरक्षित सहायता पहुंचाना है। बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) से जुड़े राहत कार्यकर्ता प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों की समस्याएं दर्ज कर उन्हें प्रशासन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा— “अत्यधिक बारिश एक प्राकृतिक घटना है। लेकिन जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, पूर्व चेतावनी, राहत संसाधन, जलनिकासी की क्षमता, क्षति का वैज्ञानिक आकलन और भविष्य के लिए शमन योजना प्रशासनिक व्यवस्था के वे हिस्से हैं जिनकी समीक्षा रिकॉर्ड और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर होनी चाहिए।” उन्होंने प्रशासन से अपील की कि राहत एवं बचाव कार्यों में सभी सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के साथ समन्वय किया जाए तथा प्रभावित परिवारों को आधिकारिक सहायता तंत्र तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत की जाए।
