भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, देश में बढ़ती खाद्य महंगाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज महंगाई आम आदमी के घर परिवार और रसोई के बचत को सीधे प्रभावित कर रही है । दाल, चावल, खाद्य तेल, सब्जियां, मसाले, दूध सहित रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से गरीब मजदूर और मध्यम वर्गी परिवार परेशान है। महंगाई का इतिहास देखें तो समय-समय पर उपयोग किए जाने वाले खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहा है जिससे गरीब मजदूर और मध्यम वर्गी परिवार वहन नहीं कर पा रही है जिससे आर्थिक तंगी से गरीब परिवार मजदूरों को गुजरना पड़ रहा है । मेहनत मजदूरी करके घर चलाने वाला इंसान आज यह सोचने को मजबूर है कि महीने की कमाई से पहले राशन खरीदने या बच्चों की फीस भरे, घर का किराया दे या इलाज और दूसरी ज़रूरी ज़रूरतें पूरी करें, लेकिन वर्तमान समय में आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते खर्च नहीं परिवारों के घरेलू बचत पर अतिरिक्त दबाव बनाया है । सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर 4.8 2% तथा खाद्य महंगाई दर 5.95 प्रतिशत रही । कुछ खाद्य वस्तुओं में इससे भी कहीं अधिक वार्षिक मूल्य वृद्धि दर्ज की गई जिससे आम उपभोक्ता की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। महंगाई केवल आंकड़ों का विषय नहीं बल्कि आम आदमी की थाली और परिवार के मासिक बजट का सवाल है । सरकार को आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर लगातार निगरानी रखने के साथ जमाखोरी और काला बाजार पर प्रभावी कार्यवाही पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा जहां आवश्यकता हो वहां तत्काल राहत के उपाय करने चाहिए । सरकार से जनता की अपेक्षा है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केवल बैठकों और आंकड़ों तक सीमित न रहते हुए ऐसे ठोस कदम उठाए जाएं जिनका असर सीधे बाजार और आम परिवार, गरीब मजदूर की रसोई में दिखाई दे । जब परिवार का बजट बिगड़ा तो उसका असर बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की ज़रूरत तक पहुंचता है । इसलिए सरकार को आम जनता को महंगाई से वास्तविक राहत देने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
