जगदलपुर/बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने पृथक बस्तर राज्य की मांग को लेकर शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक जनअभियान शुरू करने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि पृथक बस्तर राज्य की मांग भारत से अलग होने की नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत पृथक राज्य गठन की संवैधानिक मांग है। बस्तर की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक, आदिवासी एवं संसाधन संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए इस मांग पर गंभीर संवैधानिक एवं प्रशासनिक विचार आवश्यक है।
“”मोर्चे की तीन निर्णायक मांगें””:”” राज्य गठन की संवैधानिक पहल””:
अनुच्छेद 3 के तहत पृथक बस्तर राज्य के गठन पर औपचारिक प्रक्रिया/परीक्षण शुरू हो तथा सीमा, प्रशासनिक ढाँचे और वित्तीय व्यवहार्यता के अध्ययन के लिए उच्चस्तरीय पुनर्गठन समिति गठित की जाए।
“”संसाधनों और अधिकारों का हिसाब””: 1947–2026 तक खनिज एवं वन संसाधनों, रॉयल्टी, DMF तथा केंद्र–राज्य के सार्वजनिक निवेश और व्यय का वर्षवार श्वेतपत्र जारी हो। पाँचवीं अनुसूची, PESA और वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाए।””बस्तर के भविष्य का अपना विकास मॉडल””:
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि–वनोपज, स्थानीय उद्योग, सड़क–रेल, इंटरनेट, बिजली, पेयजल और सिंचाई के लिए 10-वर्षीय बस्तर विकास मास्टर प्लान बनाया जाए तथा स्थानीय संसाधनों का स्थानीय मूल्यवर्धन और स्थानीय रोजगार सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जाए।””कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति–प्रधानमंत्री को मांग-पत्र””: मोर्चा आगामी दिनों में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, बस्तर के माध्यम से राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम संवैधानिक एवं तथ्यात्मक मांग-पत्र सौंपेगा। इसके साथ बस्तर संभाग के सांसदों, विधायकों, राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, आदिवासी प्रतिनिधियों, युवाओं, किसानों, श्रमिकों और नागरिक समाज से संवाद कर व्यापक समर्थन जुटाया जाएगा।””जनप्रतिनिधियों से सीधा सवाल””: “क्या आप संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत पृथक बस्तर राज्य की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू किए जाने का समर्थन करते हैं?” मोर्चा जनप्रतिनिधियों से स्पष्ट सार्वजनिक एवं लिखित अभिमत देने की मांग करेगा।
नवनीत चाँद ने कहा-“बस्तर ने देश को अपनी प्राकृतिक संपदा दी है। अब बस्तर की जनता अपने भविष्य के निर्णय में अपनी आवाज और प्रभावी भागीदारी चाहती है। हमारा रास्ता संविधान का, संघर्ष लोकतांत्रिक और लक्ष्य पृथक बस्तर राज्य है।”
