भिलाई/प्राप्त जानकारीनुसार छावनी चौक स्थित सड़कों की हालत बद-से-बदतर हो गई हैं यहां पर जलभराव से आमजनता का आवागमन दूभर हो गया है और आएं दिन लोग हादसे के शिकार हो रहे हैं किंतु निगम प्रशासन में बैठे लोग धृतराष्ट्र होने का दिखावा कर रहे हैं जो कि समस्या की और ध्यान देने की बजाय केवल खानापूर्ति करने में लगे हुए हैं जिसकी वजह से समस्या दिनों-दिन गंभीर होती जा रही हैं। छावनी चौक का मुख्य मार्ग हो या फिर अंदरूनी सड़के यहां पर हर दस कदम की दूरी पर जलभराव की स्थिति है जो कि आने-जाने वालों के लिए सर का दर्द बन गया हैं। इन गड्ढों में जल भर जाने के कारण वाहन चालकों को पता ही नहीं चल पाता हैं कि गड्ढा कितना गहरा हैं और वे दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। जलभराव से मानव स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचता है जिससे गंभीर बीमारियां फैलती हैं और संपत्तियों को भी हानि होती हैं साथ ही साथ सड़क भी शीघ्र खराब हो जाती हैं इसके बावजूद निगम प्रशासन कुंभकरणीय नींद से जागने का नाम नहीं ले रहा हैं। जलभराव के कारण मिट्टी में ऑक्सीजन खत्म होने से पौधों की जड़े सांस नहीं ले पाती हैं और सड जाते हैं तथा मिट्टी से नाइट्रोजन और पोटेशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पानी के साथ बह जाते हैं,मिट्टी का तापमान गिरता हैं और उसमें खारापन बढ़ जाता हैं। जलभराव के कारण मानव जीवन पर भी प्रभाव पड़ता हैं रुका हुआ पानी मच्छरों का ब्रीडिंग ग्राउंड बनता हैं जिससे डेंगू और मलेरिया फैलता हैं एवं दूषित पानी के संपर्क में आने से हैजा, टाइफाइड और त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता हैं। इसके अलावा सड़को पर पानी भरने से गाड़ियों की आवाजाही में दिक्कत होती हैं मजबूरी में लोग उपयोग करते हैं,इससे निर्माण स्थलों और मकानों,इमारतों,दुकानों और फैक्टरियों की नींव में पानी घुसने से ढांचा कमजोर होता हैं और जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली के खंभों या तारों से करंट फैलने का भी जानलेवा जोखिम बना रहता हैं। इन सब कारणों को ध्यान में रखते हुए निगम प्रशासन को कड़े- से-कड़े कदम उठाने चाहिए अन्यथा कभी भी बड़ी घटना घट सकती हैं।
