जगदलपुर/बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने बाघ संरक्षण व्यवस्था, सार्वजनिक धन के उपयोग और विभागीय जवाबदेही पर उठाए सवाल; स्वतंत्र वित्तीय, तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच, श्वेतपत्र और समयबद्ध कार्यवाही की मांग।
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण की वर्तमान स्थिति, संरक्षण योजनाओं पर हुए करोड़ों रुपये के सार्वजनिक व्यय तथा विभागीय जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा है कि अब समय आ गया है कि सरकार पूरे मामले में पारदर्शिता अपनाए और जनता के सामने तथ्य रखे। उन्होंने कहा कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व केवल बस्तर की नहीं, बल्कि पूरे देश की प्राकृतिक धरोहर है। ऐसे में बाघ संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संविधान, कानून और सरकार की जवाबदेही का विषय है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21, 48A एवं 51A(g), वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, प्रोजेक्ट टाइगर एवं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से राज्य सरकार पर प्रभावी संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी, एंटी-पोचिंग व्यवस्था और जवाबदेह प्रबंधन का दायित्व निर्धारित करते हैं।
नवनीत चाँद ने कहा कि यदि पिछले कई वर्षों में बाघ संरक्षण, कैमरा ट्रैप, ड्रोन निगरानी, एंटी-पोचिंग कैंप, वन सुरक्षा, गश्ती दल और आधुनिक संसाधनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, तो जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उस निवेश का वास्तविक परिणाम क्या निकला? यदि संरक्षण व्यवस्था प्रभावी थी, तो वर्तमान स्थिति क्या है? और यदि अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है? उन्होंने कहा कि सरकार को वर्ष 2018 से वर्तमान तक इंद्रावती टाइगर रिजर्व के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार से प्राप्त समस्त राशि, मदवार व्यय, कैमरा ट्रैप एवं आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, एंटी-पोचिंग कैंपों की वास्तविक स्थिति, गश्ती रिकॉर्ड, वनरक्षकों की उपलब्धता, NTCA निरीक्षण रिपोर्ट, वन अपराधों, अभियोजन एवं दोषसिद्धि से संबंधित संपूर्ण जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। सार्वजनिक धन से संचालित योजनाओं का सार्वजनिक मूल्यांकन लोकतंत्र की मूल भावना है।बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने स्पष्ट किया कि संगठन किसी अधिकारी या कर्मचारी पर बिना जांच कोई आरोप नहीं लगा रहा है। किंतु यदि सक्षम एवं स्वतंत्र जांच में विभागीय लापरवाही, वित्तीय अनियमितता, तकनीकी कमियां अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं उत्तरदायी व्यक्तियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कानून एवं विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई होना आवश्यक है।””बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा की प्रमुख मांगें””-
वर्ष 2018 से वर्तमान तक बाघ संरक्षण पर हुए समस्त व्यय का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराया जाए। NTCA अथवा स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से तकनीकी ऑडिट कराया जाए। बाघ संरक्षण योजनाओं एवं सार्वजनिक व्यय पर श्वेतपत्र (White Paper) जारी किया जाए। बाघ शिकार एवं वन्यजीव अपराधों के सभी मामलों की स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। NTCA की निरीक्षण एवं अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के लिए समयबद्ध Tiger Recovery Action Plan लागू किया जाए। आधुनिक ड्रोन निगरानी, कैमरा ट्रैप नेटवर्क, डिजिटल पेट्रोलिंग और एंटी-पोचिंग सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। स्थानीय आदिवासी समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाए। जांच में वित्तीय, प्रशासनिक अथवा तकनीकी अनियमितता सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
संपूर्ण जांच एवं ऑडिट रिपोर्ट निर्धारित समय-सीमा में सार्वजनिक की जाए। नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर की जैव विविधता, वन और वन्यजीव किसी सरकार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की धरोहर हैं। इनकी सुरक्षा के नाम पर खर्च किया गया प्रत्येक सार्वजनिक रुपया जनता के प्रति जवाबदेह है। इसलिए पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और स्वतंत्र जांच किसी सरकार के विरोध का विषय नहीं, बल्कि सुशासन और संवैधानिक दायित्व का मूल आधार है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस विषय पर समयबद्ध, पारदर्शी और तथ्याधारित कार्यवाही सुनिश्चित नहीं करती है, तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से जनजागरण अभियान चलाकर इस मुद्दे को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा, ताकि वन्यजीव संरक्षण, सार्वजनिक धन की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही केवल सरकारी दस्तावेज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर भी प्रभावी रूप से दिखाई दे।
