भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि, गुरु नानक देव की जयंती जिसे प्रकाश पर्व भी कहा जाता है, सिख धर्म के प्रथम गुरु के जन्म दिवस के रूप में अत्यंत श्रद्धा उत्साह के साथ मनाई जाती है । गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी में ननकाना साहिब पाकिस्तान में हुआ था । उन्होंने मानवता, समानता, भाईचारे और एक ईश्वर की भक्ति का संदेश दिया । उसे समय समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास और भेदभाव के विरुद्ध उन्होंने आवाज उठाई और लोगों को सच्चाई तथा ईमानदारी का मार्ग दिखाया।
गुरु नानक देव जी ने “नाम जपो, कीरत करो और वनड छको” का उपदेश दिया जिसका अर्थ है ईश्वर का स्मरण करना मेहनत से आजीविका कामना और जरूरतमंदों के साथ बांटना । उनके द्वारा स्थापित आज विश्व भर में मानवता और सेवा का प्रतीक माना जाता है । इस दिन गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, लंगर और नगर कीर्तन का आयोजन किया जाता है, जहां सभी लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं । गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं आज भी समाज को सत्य, प्रेम और एकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है । उनकी जयंती हमें यह संदेश देती है कि हमें आपसी प्रेम, सद्भाव और सेवा की भावना को अपने जीवन में अपनाना चाहिए ।
