भिलाई/मंगल पांडे शहादत दिवस : 1857 की क्रांति का प्रेरणा स्रोत और स्वतंत्रता संग्राम की नींव – बदरुद्दीन कुरैशी

भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि, मंगल पांडे का शहादत दिवस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन के रूप में स्मरण किया जाता है । मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था । वह ईस्ट इंडिया कंपनी की सेवा में सिपाही थे लेकिन अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों के कारण उनके मन में विद्रोह की भावना जागृत हो गई । 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में उन्होंने अंग्रेज अधिकारों अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह कर दिया जिसे आगे चलकर 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी माना गया । इस घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई । उनके बलिदान पूरे देश में क्रांति के प्रेरणा बना और हजारों भारतीयों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाई। मंगल पांडे के इस बलिदान को शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो हमें देशभक्ति साहस और बलिदान की प्रेरणा देता है। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में बाद के वर्षों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महत्वपूर्ण भूमिका रही । जिसने स्वतंत्रता संग्राम को संगठित रूप दिया कांग्रेस के नेताओं ने जन आंदोलन सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ व्यापक संघर्ष किया । हालांकि मंगल पांडे का विद्रोह कांग्रेस की स्थापना 1885 से पहले हुआ था, लेकिन उनके बलिदान ने वह नींव राखी जिस पर आगे चलकर कांग्रेस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी की लड़ाई को मजबूती दी इस प्रकार मंगल पांडे को शहादत दिवस न केवल उनके साहस को नमन करता है बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत और उसके विकास को भी दर्शाता है।

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