भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, भारत में श्वेत क्रांति के जनक एवं ‘मिल्कमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. वर्गीज कुरियन की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित । डॉ. कुरियन का जीवन भारत के दुग्ध किसानों, सहकारिता और ग्रामीण आत्मनिर्भरता के लिए समर्पित रहा। 26 नवंबर 1921 को जन्मे डॉ. कुरियन का 9 सितंबर 2012 को निधन हुआ। उन्होंने आनंद मॉडल की सहकारी व्यवस्था को मजबूत करते हुए किसानों को दूध के उत्पादन से लेकर उसके विपणन तक की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भागीदारी दिलाई।डॉ. कुरियन की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘ऑपरेशन फ्लड’ थी, जिसने भारत के दुग्ध क्षेत्र को नई दिशा दी। वर्ष 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की स्थापना के बाद डॉ. कुरियन ने सहकारी दुग्ध मॉडल को देशभर में विस्तार देने का कार्य किया और वर्ष 1970 में ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत हुई। यह कार्यक्रम तीन चरणों में आगे बढ़ा और गांवों के दुग्ध उत्पादकों को सहकारी समितियों से जोड़कर उन्हें बेहतर बाजार, उचित मूल्य और आत्मनिर्भरता का अवसर प्रदान किया। इसी ऐतिहासिक प्रयास के कारण डॉ. कुरियन को भारत की श्वेत क्रांति का वास्तुकार माना जाता है। डॉ. वर्गीज कुरियन केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ाने वाले व्यक्तित्व नहीं, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाले महान राष्ट्रनिर्माता थे। उनके प्रयासों ने भारत को दूध की कमी वाले देश से विश्व के प्रमुख दुग्ध उत्पादक देशों में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत किया। उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म विभूषण, रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और विश्व खाद्य पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए। बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि डॉ. कुरियन की सहकारिता, किसान सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की सोच आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।
