भिलाई/नगर पालिक निगम भिलाई, IIT भिलाई एवं केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के संयुक्त सहयोग से “जल रक्षा भिलाई” एकीकृत जल संरक्षण एवं प्रबंधन पहल को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में प्रथम समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य भिलाई में विज्ञान एवं तकनीक आधारित जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, शहरी जल निकासी व्यवस्था, जलभराव की रोकथाम तथा जल गुणवत्ता में सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। बैठक में निगम क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु के दौरान जल की कम उपलब्धता, वर्षा ऋतु में जलभराव, पेयजल में सीवेज के पानी के मिश्रण जैसी गंभीर समस्याओं तथा जल के पुनः उपयोग की कम दर पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में बोरवेल रिचार्ज शाफ्ट के तत्काल निर्माण तथा संबंधित प्राक्कलनों के आदान-प्रदान के बाद आवश्यक स्वीकृति की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने पर जोर दिया गया। परियोजना के अंतर्गत जीआईएस एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भिलाई के प्राकृतिक जल निकासी तंत्र की पहचान, जलभराव की रोकथाम के लिए कम लागत वाले वैज्ञानिक समाधान, सीवेज एवं जलापूर्ति लाइनों का अध्ययन तथा समस्या-ग्रस्त क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। इसके साथ ही जी आई एस आधारित भूजल मानचित्रण कर अधिकतम भूजल पुनर्भरण क्षमता वाले क्षेत्रों में कम लागत की संरचनाओं के निर्माण के उपाय सुझाए जाएंगे। बैठक में सतही जल पर निर्भरता बढ़ाने, रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान एवं वैज्ञानिक उपचार, मौजूदा रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं में आवश्यक सुधार, प्रशिक्षण एवं हैंड-होल्डिंग सहायता तथा परियोजना से संबंधित समस्त आवश्यक दस्तावेजीकरण पर भी चर्चा की गई। “जल रक्षा भिलाई” के अंतर्गत तैयार की जाने वाली कार्ययोजना को समयबद्ध रूप से लागू करने पर विशेष बल दिया गया। लक्ष्य रखा गया है कि आवश्यक जल संरक्षण एवं पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण वर्ष 2027-28 के मानसून से पूर्व पूर्ण कर लिया जाए। इसके लिए डी पी आर तैयार करने, स्वीकृति प्रदान करने तथा निर्माण कार्य प्रारंभ करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी। इस पहल का ध्येय वाक्य है “जल रक्षा भिलाई — सतत भविष्य के लिए विज्ञान-आधारित जल सुरक्षा।”नगर पालिक निगम भिलाई, IIT भिलाई एवं CGWB के समन्वित प्रयास से यह पहल भिलाई में दीर्घकालिक जल सुरक्षा, बेहतर जल प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
