भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, नीलम संजीव रेड्डी देश के छठवें राष्ट्रपति थे । उनका जन्म 19 मई 1913 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में इल्लूर गांव में हुआ था । वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और महात्मा गांधी के विचारों से अत्यधिक प्रभावित थे । उन्होंने कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़कर देश की सेवा का मार्ग चुना और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया । कई बार उन्हें अंग्रेजों द्वारा जेल भी भेजा गया स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नीलम संजीव रेड्डी ने भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने और राज्य के विकास के लिए अनेक कार्य की उनके नेतृत्व में सिंचाई कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिला । बाद में वे लोकसभा के अध्यक्ष भी बने । उन्होंने संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने का कार्य किया । 1964 में नीलम संजीव रेड्डी राष्ट्रीय राजनीति में आए और प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इन्हें केंद्र में स्टील एवं खान मंत्रालय का भार सौंप दिया । सन 1977 में वे भारत के छठवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए और वह देश के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति बने जिन्हें निर्विरोध चुना गया ।राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने सादगी, निष्पक्षता और संविधान की मर्यादा का पालन करते हुए देश की सेवा की उनका कार्यकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि उस समय देश के आपातकाल के बाद नई राजनीतिक परिस्थितियों से गुजर रहा था । नीलम संजीव रेड्डी का जीवन ईमानदारी सादगी और राष्ट्र सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है । उन्होंने हमेशा लोकतंत्र संविधान और जनता के हितों को सर्वोपरि रखा उनकी जयंती पर हम उनके महान योगदान को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संकल्प करते हैं।
